न्यायालय ने सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ याचिका पर सुनवाई सात जनवरी तक स्थगित की

न्यायालय ने सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ याचिका पर सुनवाई सात जनवरी तक स्थगित की

न्यायालय ने सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ याचिका पर सुनवाई सात जनवरी तक स्थगित की
Modified Date: December 15, 2025 / 05:03 pm IST
Published Date: December 15, 2025 5:03 pm IST

नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका)के तहत जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने के खिलाफ उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंगमो द्वारा दाखिल याचिका पर सोमवार को सुनवाई सात जनवरी, 2026 तक के लिए स्थगित कर दी।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारी की पीठ ने समय की कमी के कारण मामले को स्थगित कर दिया। याचिका में दावा किया गया है कि हिरासत अवैध और मनमानी कार्रवाई है जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।

शीर्ष अदालत ने 24 नवंबर को मामले पर सुनवाई तब स्थगित कर दी थी जब केंद्र और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अंगमो द्वारा दायर प्रत्युत्तर का जवाब देने के लिए समय देने का अनुरोध किया था।

लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर को वांगचुक को रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था। इन प्रदर्शनों के दौरान लद्दाख में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे। सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।

रासुका केंद्र और राज्यों को ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनपर देश की सुरक्षा के लिए हानिकारक कार्य करने की आशंका होती है। इस कानून के तहत अधिकतम हिरासत अवधि 12 महीने है। हालांकि इसे पहले भी रद्द किया जा सकता है।

भाषा

धीरज नरेश

नरेश


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