न्यायालय ने जियोस्टार की याचिका खारिज की, सीसीआई को जांच करने की अनुमति दी

न्यायालय ने जियोस्टार की याचिका खारिज की, सीसीआई को जांच करने की अनुमति दी

न्यायालय ने जियोस्टार की याचिका खारिज की, सीसीआई को जांच करने की अनुमति दी
Modified Date: January 27, 2026 / 03:54 pm IST
Published Date: January 27, 2026 3:54 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्वामित्व वाले स्ट्रीमिंग मंच जियोस्टार की उस अर्जी पर सुनवाई करने से मना कर दिया, जिसमें केरल केबल टेलीविजन बाजार में उसके दबदबे के गलत इस्तेमाल के आरोपों की भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की जांच रोकने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि मामला शुरुआती चरण में है और बाजार नियामक को नियमित जांच जारी रखने की इजाजत दी जा सकती है।

पीठ ने जियोस्टार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी से कहा, ‘‘माफ कीजिए। विनियामक को जांच करने दें। यह अभी शुरुआती चरण में है। (याचिका को) खारिज किया जाता है।’’

रोहतगी ने कहा कि जियोस्टार भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) अधिनियम, 1997 के तहत बंधा हुआ है, जो यह तय करता है कि वह कितना शुल्क ले सकता है या कितनी छूट दे सकता है।

रोहतगी ने कहा, ‘‘सवाल यह है कि क्या आप ‘सेक्टोरल’ विनियामक के तहत आने वाले मामले के संबंध में जांच कर सकते हैं। मेरे पक्ष में बंबई उच्च न्यायालय का एक फैसला है।’’

न्यायमूर्ति पारदीवाला ने रोहतगी से कहा कि इस मामले पर गौर करने की जरूरत है।

शिकायत करने वाली कंपनी, एशियानेट डिजिटल नेटवर्क लिमिटेड (एटीएनपीएल) ने जियोस्टार पर आरोप लगाया है कि उसने केरल कम्युनिकेटर्स केबल लिमिटेड (केसीसीएल) को भेदभाव के साथ छूट वाले भुगतान और विशेष तवज्जो देकर टेलीविज़न प्रसारण क्षेत्र में अपने दबदबे का गलत इस्तेमाल किया है जो प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का उल्लंघन है।

जियोस्टार ने केरल उच्च न्यायालय के 3 दिसंबर, 2025 के एक आदेश को चुनौती दी है। इस आदेश में प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के उल्लंघन के आरोपों में सीसीआई की जांच रोकने से इनकार करने के एकल न्यायाधीश के आदेश की पुष्टि की गई है।

सीसीआई ने महानिदेशक को डिजिटल टीवी सेवा प्रदाता एडीएनपीएल की ओर से जियोस्टार और उसकी सहायक कंपनियों के खिलाफ केसीसीएल को कथित भेदभाव वाली कीमत और बहुत अधिक छूट देने के आरोपों में की गई शिकायतों की जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि केसीसीएल से विशेष व्यवहार के कारण, एडीएनपीएल के ग्राहक आधार में भारी गिरावट आई, जो पांच-छह महीने के छोटे समय में ही बहुत कम हो गया।

ट्राई के नियमों के तहत, प्रसारणकर्ता 35 प्रतिशत तक छूट दे सकते हैं और उन्हें बिना भेदभाव वाली मूल्य प्रणाली अपनानी चाहिए।

एशियानेट ने दावा किया है कि जियोस्टार ने अलग-अलग मार्केटिंग या प्रचार समझौतों के जरिए केसीसीएल को 50 प्रतिशत से अधिक छूट दी।

भाषा वैभव अविनाश

अविनाश


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