न्यायालय ने राज्य मानवाधिकार आयोगों में रिक्त पदों को भरने संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
न्यायालय ने राज्य मानवाधिकार आयोगों में रिक्त पदों को भरने संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें कुछ राज्य मानवाधिकार आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को शीघ्रता से भरने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उसने संबंधित उच्च न्यायालय का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया।
याचिका पर सुनवाई को लेकर पीठ के अनिच्छा जताने के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।
पीठ ने उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति देने के साथ ही कानून के तहत उपलब्ध अन्य कानूनी विकल्पों का लाभ उठाने की छूट प्रदान कर दी।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने राज्य मानवाधिकार आयोगों में रिक्त पदों का हवाला दिया और कहा कि उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में पिछले दो वर्षों से कोई अध्यक्ष नहीं है।
उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने पहले भी इसी तरह के एक मामले में नोटिस जारी किया था।
पीठ ने पूछा कि याचिकाकर्ता ने अलग से याचिका क्यों दायर की है?
वकील ने कहा कि पिछली याचिका राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में रिक्तियों को भरने के संबंध में थी, जबकि वर्तमान में दायर की गई याचिका राज्य मानवाधिकार आयोगों में रिक्तियों से संबंधित है।
पीठ ने कहा, ‘‘आप उच्च न्यायालय क्यों नहीं गए? उच्च न्यायालय इन सभी मामलों की निगरानी करते रहे हैं।’’
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह याचिका कई राज्यों से संबंधित है और उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग निष्क्रिय हो जाएगा।
याचिका में संबंधित अधिकारियों को राज्य मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, ताकि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत मानवाधिकारों के प्रभावी प्रवर्तन को सुनिश्चित किया जा सके।
भाषा नेत्रपाल पवनेश
पवनेश
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