न्यायालय ने परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी देने से संबंधित याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा

न्यायालय ने परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी देने से संबंधित याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा

न्यायालय ने परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी देने से संबंधित याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा
Modified Date: April 1, 2026 / 05:15 pm IST
Published Date: April 1, 2026 5:15 pm IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी देने से संबंधित कई याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिनमें पुनर्विचार याचिकाएं भी शामिल हैं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी सहित कई वकीलों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

उच्चतम न्यायालय फिलहाल ‘वनशक्ति’ फैसले को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिकाओं सहित कई याचिकाओं पर नए सिरे से सुनवाई कर रहा है।

वर्ष 2025 के फैसले में शुरू में केंद्र को उन परियोजनाओं को पूर्वव्यापी मंजूरी देने से रोक दिया गया था, जिन्होंने अनिवार्य पर्यावरणीय अनुमोदन के बिना परिचालन शुरू कर दिया था, हालांकि बाद में हजारों करोड़ रुपये के सार्वजनिक निवेश की संभावित बर्बादी को रोकने के लिए इस फैसले पर रोक लगा दी गई थी।

पिछले साल 18 नवंबर को, तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने 2:1 के बहुमत से एक अंतरिम आदेश द्वारा अपने ही फैसले को पलट दिया और पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी देने का मार्ग प्रशस्त किया।

तब पीठ ने कहा था कि ऐसा नहीं करने पर ‘‘हजारों करोड़ रुपये बर्बाद हो जाएंगे।’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि यदि 16 मई, 2025 के उस फैसले को वापस नहीं लिया गया, जिसमें केंद्र को परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंजूरी देने से रोक दिया गया था, तो सरकारी खजाने से लगभग 20,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजनाएं बर्बाद हो जाएंगी।

भाषा शफीक नरेश

नरेश


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