मातृत्व के बाद महिला खिलाड़ियों की वापसी नीति पर अदालत ने डब्ल्यूएफआई, केंद्र से मांगा जवाब

मातृत्व के बाद महिला खिलाड़ियों की वापसी नीति पर अदालत ने डब्ल्यूएफआई, केंद्र से मांगा जवाब

मातृत्व के बाद महिला खिलाड़ियों की वापसी नीति पर अदालत ने डब्ल्यूएफआई, केंद्र से मांगा जवाब
Modified Date: September 1, 2026 / 06:36 pm IST
Published Date: September 1, 2026 6:36 pm IST

नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पहलवान विनेश फोगाट की याचिका पर भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) और केंद्र सरकार से जवाब मांगा। विनेश ने यह याचिका गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद प्रतिस्पर्धी खेल में लौटने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए एक निष्पक्ष व व्यवस्थित कार्यढांचा बनाने के अनुरोध को लेकर दायर की थी।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने फोगाट की याचिका पर भारतीय ओलंपिक संघ को भी नोटिस जारी किया और मामले को 18 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया।

फोगाट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजशेखर राव ने कहा, “यह महिला खिलाड़ियों, मातृत्व अवकाश और खेल में हिस्सा लेने की उनकी क्षमता पर पड़ने वाले असर से जुड़ा एक बड़ा सवाल है। असल में, अंतरराष्ट्रीय मानक यह हैं कि जो महिला खिलाड़ी मातृत्व अवकाश लेती है, उसे कुछ फायदे दिए जाते हैं और उसकी रैंकिंग वगैरह सुरक्षित रखी जाती है।”

अपनी याचिका में फोगाट ने अनुरोध किया कि मातृत्व के बाद लौटने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए एक निष्पक्ष और व्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाए, चयन और नामांकन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रूप से जांची जा सकने वाली हो, और मातृत्व की वजह से अनुपस्थित रहने के कारण नुकसान उठाने वाली खिलाड़ियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था हो।

उन्होंने उन प्रतियोगिताओं पर विचार करने का भी अनुरोध किया जिनके लिए वह योग्य हैं, और साथ ही घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए एक निश्चित और समय-सीमा वाला कैलेंडर भी दिये जाने का अनुरोध किया।

जुलाई 2025 में मां बनीं फोगाट ने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद जब उन्होंने अपना कुश्ती का करियर फिर से शुरू किया, तो उन्हें बिना किसी रियायत के सीधे प्रतिस्पर्धा की प्रक्रिया में शामिल होना पड़ा, जबकि मातृत्व की वजह से वह कुछ समय तक प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पाई थीं।

फोगाट ने एक और याचिका भी दायर की है, जिसमें डब्ल्यूएफआई की ओर से उन्हें जारी किए गए दो ‘कारण बताओ नोटिस’ और उनके खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द करने की अपील की गई है।

अदालत ने डब्ल्यूएफआई के वकील से इस मामले में निर्देश लेने को कहा और सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की।

डब्ल्यूएफआई के वकील ने कहा कि उन्होंने दो बार सुनवाई रखी, लेकिन “कोई नहीं आया”; अब एक आखिरी मौका दिया गया है और सुनवाई दो सितंबर को होगी।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश


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