न्यायालय नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने संबंधी याचिका पर एक सितंबर को करेगा सुनवाई
न्यायालय नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने संबंधी याचिका पर एक सितंबर को करेगा सुनवाई
नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय मंगलवार को दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर सुनवाई करने को सहमत हो गया, जिसमें नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज 13 प्राथमिकी रद्द करने और हिंसा में भूमिका की जांच के लिए आंदोलन के दौरान मौजूद 2,873 लोगों के खिलाफ नया मामला दर्ज करने की अनुमति मांगी है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की उस दलील पर संज्ञान लिया, जिसमें उन्होंने मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था।
दिन की कार्यवाही जब समाप्त होने वाली थी, तभी मेहता ने कहा, ‘‘हम एक हस्तक्षेप याचिका दाखिल करना चाहते हैं। यह प्रदर्शन से जुड़ी प्राथमिकी रद्द करने से संबंधित है…हम संविधान के अनुच्छेद 142 का हवाला दे रहे हैं।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर दोनों पक्षों के बीच समझौता हो रहा है, तो उसे कोई आपत्ति नहीं है और उसने मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा 25 जुलाई को लिये गए फैसले के अनुसार, दिल्ली पुलिस अब कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के विरोध प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज 13 प्राथमिकी को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है।
याचिका में कहा गया, ‘‘यह बताया गया है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटाबेस के अनुसार गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोग प्रथम दृष्टया प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पाए गए थे। यह जांच करना जरूरी है कि उक्त प्रदर्शनों के दौरान शारीरिक नुकसान पहुंचाने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े अपराधों को अंजाम देने में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं।’’
याचिका में कहा गया, ‘‘दिल्ली पुलिस इन 2,873 लोगों के खिलाफ नयी प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति चाहती है। इस नयी और विशेष प्राथमिकी का पंजीकरण तथा उसके बाद की जांच ‘आपराधिक पृष्ठभूमि’ शब्द की अदालत द्वारा की गई व्याख्या के अनुरूप होगी।’’
दिल्ली पुलिस ने कहा कि इस याचिका में जिन घटनाओं का उल्लेख किया गया है, उन्हें लेकर कोई नयी प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी।
याचिका में कहा गया, ‘‘व्यापक जनहित और इस मामले के विशिष्ट तथ्यों को देखते हुए, आवेदक संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत इस अदालत के असाधारण अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए प्राथमिकी रद्द करने और नयी प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगता है। अदालत से अनुरोध है कि इस याचिका को मंजूर करते हुए स्पष्ट करे कि उसका आदेश इस मामले के विशिष्ट तथ्यों पर आधारित है और इसे भविष्य के मामलों के लिए नजीर नहीं माना जाएगा।’’
यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि कॉजपा ने दिल्ली में विरोध मार्च का आह्वान किया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र ने परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ 36 दिन तक चले उसके आंदोलन को वापस लेने के लिए 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया है।
कॉजपा के अनुसार, यह मार्च शिक्षक दिवस के दिन निकाला जाएगा। इसमें उन छात्रों के परिवार शामिल होंगे, जिन्होंने नीट परीक्षा रद्द होने और बाद में दोबारा परीक्षा कराए जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा, जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिवार भी मार्च में शामिल होंगे।
शीर्ष अदालत ने इससे पहले पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार-प्राप्त जांच समिति गठित की थी। समिति को नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ देशभर में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों और आरोपों की जांच करनी थी, जिनमें छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती के आरोप भी शामिल थे।
तीन अगस्त को शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने संबंधी उसके आदेश में इस्तेमाल किए गए शब्द ‘‘आपराधिक पृष्ठभूमि’’ का मतलब केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों से है। अदालत ने कहा था कि राज्य सरकारें कानून के मुताबिक बाकी छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी बंद या वापस ले सकती हैं।
यह स्पष्टीकरण केंद्र की उस दलील के बाद आया था, जिसमें उसने कहा था कि वह नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को आगे नहीं बढ़ाने को लेकर ‘‘गंभीर’’ है, बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। इसमें 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित ‘संसद मार्च’ भी शामिल था।
दिल्ली में 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुई थीं। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
छात्रों के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों का असर कई शहरों तक पहुंचा था। इनका मुख्य मुद्दा तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग था।
बीस जून को जंतर-मंतर पर शुरू हुआ आंदोलन 25 जुलाई को उस वक्त खत्म कर दिया गया, जब प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और सरकार ने कॉजपा की अन्य मांगें भी मान लीं।
भाषा आशीष सुरेश
सुरेश

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