सीसीटीएनएस का दूसरा संस्करण एआई से लैस होगा : गृह मंत्रालय
सीसीटीएनएस का दूसरा संस्करण एआई से लैस होगा : गृह मंत्रालय
नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली (सीसीटीएनएस) के निर्माणाधीन दूसरे संस्करण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित टूल शामिल किए जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को यह जानकारी दी है।
सीसीटीएनएस देशभर के 17,000 पुलिस थानों को एक केंद्रीकृत ऑनलाइन मंच से जोड़ता है।
गृह मंत्रालय की ओर से सीसीटीएनएस के दूसरे संस्करण के बारे में दी गई जानकारी को एआई के उदय के प्रभाव और संबंधित मुद्दों को लेकर संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी (2024-25) पर संसद की स्थायी समिति की सोमवार को पेश रिपोर्ट में शामिल किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष लोकसभा सदस्य निशिकांत दुबे हैं।
मंत्रालय ने समिति को बताया है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने निर्माणाधीन सीसीटीएनएस 2.0 के लिए एआई के कई उपयोगों की परिकल्पना की है, जिसमें ‘एंटिटी रेजोल्यूशन’ और आपराधिक प्रोफाइलिंग शामिल है, जहां सिस्टम अलग-अलग मामलों की साझा कड़ी को एक समान संदिग्ध से “जोड़” सकता है और राज्यों के भीतर एवं बाहर विभिन्न पुलिस थानों में मौजूद प्राथमिकी संबंधी डेटा के आधार पर किसी व्यक्ति की समग्र आपराधिक प्रोफाइल तैयार कर सकता है।
मंत्रालय की ओर से समिति को दी गई जानकारी में कहा गया है कि सीसीटीएनएस 2.0 में स्वचालित अनुमान टूल भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है, जो एआई-एलएलएम मॉडल का इस्तेमाल कर प्राथमिकी की सामग्री से कृत्यों और धाराओं की पहचान कर सकता है।
मंत्रालय ने बताया है कि सीसीटीएनएस 2.0 अपराध के इतिहास, सामाजिक या सांस्कृतिक घटनाक्रमों और अन्य स्थानीय कारकों (जैसे कि मादक पदार्थ की तस्करी के लिए कुख्यात क्षेत्रों) को जोड़ने वाली ‘रिस्क टेरेन मॉडलिंग’ (आरटीएम) की मदद से यह भी अनुमान लगा सकेगा कि अपराध कहां हो सकता है और उस हिसाब से संबंधित क्षेत्र के लिए योजना बनाई जा सकेगी।
उसने कहा है कि एआई टूल की मदद से अपराधियों की सूचियों का विश्लेषण कर और उनसे संभावित खतरों का आकलन कर सीसीटीएनएस 2.0 ‘हिस्ट्रीशीटर’ की पहचान करने में भी मदद करेगा।
मंत्रालय ने कहा है कि एआई का इस्तेमाल वांछित अपराधियों की पहचान और कुशल यातायात प्रबंधन के लिए भी किया जा सकता है।
उसने समिति को बताया है, “एआई विशाल डेटासेट का तेजी से विश्लेषण करके, विसंगतियों की पहचान करके, चलन का अनुमान लगाकर और साझा कड़ियां जोड़कर खुफिया जानकारी जुटाने तथा आतंकवाद विरोधी प्रयासों को अंजाम देने की अपनी क्षमता बढ़ाने में भी सुरक्षा एजेंसियों की मदद कर रहा है, जिससे इन क्षेत्रों में निर्णय लेने, त्वरित कार्रवाई करने और सटीक कदम उठाने की क्षमता में सुधार हो रहा है।”
मंत्रालय ने अपनी साइबर अपराध निरोधक इकाई भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के ऑनलाइन अपराधों का पता लगाने के लिए एआई का इस्तेमाल बढ़ाने का भी जिक्र किया है।
उसने कहा कि आई4सी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बंबई के सहयोग से व्यवहार और लेन-देन के चलन का विश्लेषण करके संदिग्ध खातों को स्कोर देने के लिए एआई के इस्तेमाल की संभावनाओं का पता लगा रहा है, ताकि पुष्ट संदिग्ध खातों की पहचान करने में मदद मिल सके।
मंत्रालय ने कहा, “आई4सी ‘रिजर्व बैंक इनोवेशन हब’ (आरबीआईएच) के साथ मिलकर एक ऐसा मॉडल विकसित करने पर भी काम कर रहा है, जो वित्तीय लेन-देन के लिए वास्तविक समय में संदिग्ध स्कोर प्रदान करता है, जिससे बैंक धोखाधड़ी वाले लेन-देन को पहले से ही चिह्नित कर सकें और संभावित रूप से रोक सकें।”
भाषा पारुल माधव
माधव

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