शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए: विहिप

शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए: विहिप

शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए: विहिप
Modified Date: May 27, 2026 / 04:21 pm IST
Published Date: May 27, 2026 4:21 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने ईद-उल-अज़हा के दौरान गोहत्या पर मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग के ‘‘जोर देने’’ पर बुधवार को आपत्ति जताते हुए कहा कि समाज में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

विहिप के केंद्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि हिंदू समुदाय गाय को ‘‘गौ माता’’ के रूप में पूजता है और आरोप लगाया कि गोहत्या का समर्थन करने वाले बार-बार दिए जाने वाले तर्क हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।

जैन ने कहा, ‘‘हिंदू समाज में गाय को माता के रूप में पूजा जाता है। इसके बावजूद, इस तरह की ज़िद बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। गोहत्या को जायज़ ठहराने के लिए हर दिन नये-नये तर्क दिए जा रहे हैं, और ये हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।’’

उन्होंने गाय को ‘‘राष्ट्रीय पशु’’ घोषित करने की दलीलों का भी विरोध किया और दावा किया कि ‘‘गौ माता’’ को महज पशु कहना हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाना है।

उन्होंने कहा, ‘‘गौ माता को केवल पशु कहना गौ माता और हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के समान है। राष्ट्र और सनातन परंपराओं से जुड़े प्रतीकों के प्रति दृष्टिकोण सर्वविदित है।’’

जैन ने पिछली घटनाओं का हवाला देते हुए 2017 के पशु वध नियमों का जिक्र किया और आरोप लगाया कि इन नियमों के लागू होने के बाद भी कुछ राज्यों में गायों का खुलेआम वध किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब 2017 में पशु वध को विनियमित करने के लिए नियम बनाये गए, तो उनमें गायों को भी शामिल किया गया। कुछ राज्यों में जहां सरकारें इसके समर्थन में थीं, वहां कथित तौर पर गायों का खुलेआम वध किया गया। जो दृश्य देखने को मिले वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय हैं।’’

विहिप के नेता ने कहा कि देश के आधे से अधिक हिस्से में गोहत्या विरोधी कानून लागू हैं और उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदू समुदाय गोहत्या को बर्दाश्त नहीं करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हिंदू समाज किसी भी कीमत पर गोहत्या को बर्दाश्त नहीं करेगा। लोगों को गौ माता से जुड़ी भावनाओं को समझना चाहिए और देश के बड़े हिस्से में पहले से लागू कानूनों का सम्मान करना चाहिए।’’

इतिहास का हवाला देते हुए जैन ने दावा किया कि 1857 का विद्रोह भी गायों की रक्षा से जुड़ा था।

उन्होंने समुदायों के बीच परस्पर सम्मान की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जैन ने कहा, ‘‘यदि समाज में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व बनाए रखना है, तो प्रत्येक समुदाय को दूसरों की धार्मिक मान्यताओं और भावनाओं का सम्मान करना सीखना चाहिए।’’

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश


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