जम्मू, 25 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की जम्मू स्थित विशेष अदालत ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को यहां कोट भलवाल स्थित केंद्रीय कारागार से अस्पताल या अदालत ले जाते समय अनावश्यक रूप से हथकड़ी न लगाई जाए।
यह आदेश शाह की उस याचिका पर आया है जिसमें उसने कहा था कि हथकड़ी लगाने से उसे दर्द हो सकता है तथा उसके स्वास्थ्य को और नुकसान हो सकता है।
शाह को एनआईए ने अप्रैल में श्रीनगर के नाज क्रॉसिंग पर एक आतंकवादी के अंतिम संस्कार के दौरान हुई भीड़ हिंसा और पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी से संबंधित तीन दशक पुराने मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था।
शाह की यह गिरफ्तारी एनआईए के अन्य मामलों में लगभग सात साल जेल की सजा काटने के उपरांत जमानत पर रिहा होने के तुरंत बाद हुई थी।
विशेष एनआईए अदालत जम्मू के न्यायाधीश प्रेम सागर ने शाह द्वारा दायर उस आवेदन का निपटारा करते हुए 18 अगस्त को यह निर्देश पारित किया जिसमें उसने तत्काल चिकित्सा उपचार के साथ-साथ अस्पताल या अदालत ले जाने के दौरान हथकड़ी या बेड़ियां न लगाने के संबंध में विशिष्ट निर्देश देने का अनुरोध किया था।
अदालत ने अपने चार पन्नों के आदेश में कहा, ‘‘केंद्रीय जेल कोट भलवाल के अधीक्षक से प्राप्त मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी को विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा इलाज मुहैया कराया गया और चिकित्सक द्वारा भी उसकी जांच की गई। आरोपी को स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आहार दिया जा रहा है और उसे उसकी सुविधा के लिए आवश्यक सामान प्रदान किया गया है।’’
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आरोपी की आयु 74 वर्ष है और वह कई बीमारियों से पीड़ित है। इस स्थिति में यदि आवेदक को किसी विशेष उपचार की आवश्यकता होती है, तो जेल अधिकारियों द्वारा आवश्यकता पड़ने पर उसे विशेषज्ञ डॉक्टर/डॉक्टरों के पास ले जाया जाए। जेल से अस्पताल या अदालत ले जाते समय जेल अधिकारी जेल नियमावली के अनुसार नियमों का पालन करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि आरोपी को अनावश्यक रूप से हथकड़ी न लगाई जाए तथा उसकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाएं।’’
शाह ने अपनी उम्र और उच्च रक्तचाप, मधुमेह, सर्वाइकल और लंबर स्पोंडिलाइटिस जैसी कई बीमारियों का हवाला दिया था।
याचिका में तर्क दिया गया था कि नाजुक स्वास्थ्य और शारीरिक अक्षमता को देखते हुए हथकड़ी लगाने से उसे दर्द हो सकता और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
एनआईए ने गृह मंत्रालय के निर्देशों पर अप्रैल में 1996 के इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी और इसके बाद 10 जुलाई 2026 को जम्मू में एनआईए विशेष अदालत के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किया था।
भाषा खारी रंजन
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