बच्ची का यौन उत्पीड़न : जनकपुरी के निजी स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है दिल्ली सरकार

बच्ची का यौन उत्पीड़न : जनकपुरी के निजी स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है दिल्ली सरकार

बच्ची का यौन उत्पीड़न : जनकपुरी के निजी स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है दिल्ली सरकार
Modified Date: May 11, 2026 / 03:09 pm IST
Published Date: May 11, 2026 3:09 pm IST

नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) दिल्ली सरकार पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी स्थित एक निजी स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है, क्योंकि स्कूल परिसर में तीन साल की बच्ची के साथ कथित बलात्कार के मामले में स्कूल प्रशासन को जारी कारण बताओ नोटिस का अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

बाल सुरक्षा, पर्यवेक्षण और वैधानिक मानदंडों के अनुपालन में गंभीर खामियों का हवाला देते हुए, शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने आठ मई को स्कूल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें चेतावनी दी गई कि संतोषजनक जवाब देने में विफल रहने पर दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियम (डीएसईएआर) के प्रावधानों के तहत उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है और प्रबंधन अपने हाथ में लिया जा सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि स्कूल अधिकारियों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया था। हालांकि, शिक्षा विभाग को अभी तक जवाब नहीं मिला है और विभाग बाल सुरक्षा उपायों में कथित कमियों के लिए स्कूल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की योजना बना रहा है।

पुलिस के अनुसार, बच्ची की मां ने एक मई को जनकपुरी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया कि उनकी बेटी के स्कूल में दाखिले के दूसरे दिन 30 अप्रैल को स्कूल में उसका यौन उत्पीड़न किया गया।

इस संबंध में स्कूल के 57 वर्षीय कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि घर लौटने के बाद बच्ची ने दर्द की शिकायत की और बाद में अपनी मां को बताया कि उसे स्कूल के अंदर एक सुनसान इलाके में ले जाया गया था, जहां आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया।

शिक्षा विभाग ने आठ मई को जारी अपने नोटिस में कहा कि प्रारंभिक जांच में स्कूल प्रशासन की ओर से कई उल्लंघन और कमियां पाई गईं।

शिक्षा विभाग ने आरोप लगाया कि स्कूल में पर्याप्त निगरानी तंत्र का अभाव है जिसमें संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे न लगाना शामिल है।

इसमें परिसर के भीतर बाल संरक्षण उपायों और निवारक तंत्रों के कार्यान्वयन में कथित विफलताओं को भी उजागर किया गया।

नोटिस में कहा गया कि नर्सरी और प्री प्राइमरी कक्षाएं कथित तौर पर मान्यता प्राप्त मुख्य परिसर से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित एक अलग निजी परिसर में अधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना चलाई जा रही थीं।

इसमें कहा गया है, ‘छात्रों को कथित तौर पर अनधिकृत परिसर में स्थानांतरित करने से सुरक्षा संबंधी चिंताएं पंदा हुई हैं साथ ही वैधानिक अनुपालन और भूमि आवंटन की शर्तों का उल्लंघन हुआ है।’’

शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन से सोमवार (11 मई) तक कर्मचारियों की तैनाती, सीसीटीवी रिकॉर्ड, बाल सुरक्षा नीति, आरोपी के खिलाफ निलंबन प्रक्रिया, अग्नि और भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र और अलग परिसर से कक्षाएं संचालित करने की अनुमति से संबंधित विवरण प्रस्तुत करने को कहा था।

नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित तिथि तक संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत करने में विफल रहने पर मान्यता रद्द कर दी जाएगी, प्रबंधन का अधिग्रहण कर लिया जाएगा और दिल्ली विकास प्राधिकरण को पट्टा या भूमि आवंटन रद्द करने की सिफारिश की जाएगी।

घटनाक्रम से अवगत अधिकारियों ने बताया कि सोमवार दोपहर तक स्कूल अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है और विभाग स्कूल के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की योजना बना रहा है।

पुलिस के अनुसार, नर्सरी की छात्रा पर कथित यौन हमले के संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) के तहत नाबालिगों के बलात्कार से संबंधित और बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने बताया कि बच्ची ने आरोपी की पहचान कर ली, जिसके बाद स्कूल के 57 वर्षीय केयरटेकर को एक मई को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उसे अदालत में पेश किया गया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

हालांकि, अभियोजन पक्ष के कड़े विरोध के बावजूद, द्वारका की एक अदालत ने सात मई को उसे जमानत दे दी। पुलिस ने बताया कि वह स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में