शाह ने कोलकाता में ‘शब्द संग्रहालय’ का उद्घाटन किया
शाह ने कोलकाता में ‘शब्द संग्रहालय’ का उद्घाटन किया
(फोटो सहित)
कोलकाता, 19 जुलाई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को यहां राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में ‘शब्द संग्रहालय’ का उद्घाटन किया। उन्होंने देश की भाषाई विविधता को संरक्षित करने की वकालत करते हुए कहा कि यह भारत की सभ्यतागत पहचान को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने संग्रहालय के उद्घाटन को ‘‘भारतीय संस्कृति के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव’’ बताया और कहा कि देश में संकीर्ण सोच के लिए कोई जगह नहीं है।
शाह ने कहा, ‘‘हमने कभी किसी विचारधारा को नियंत्रित करने या किसी की आस्था के रास्ते में बाधा डालने की कोशिश नहीं की। संकीर्ण सोच भारतीय संस्कृति की पहचान नहीं हो सकती।’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्स्थापित करने और उसे मजबूत करने का संकल्प लिया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसी देश की भाषा उसकी विरासत को संजोए रखती है और उसकी संस्कृति को जानने-समझने का माध्यम बनती है।
कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि भाषा के बिना किसी भी देश की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति संभव नहीं है।
यह जीवंत अनुभव प्रदान करने वाला भारत का पहला भाषा संग्रहालय है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय पुस्तकालय द्वारा विकसित यह संग्रहालय भारत की समृद्ध भाषाई विरासत को समर्पित है। इसमें अत्याधुनिक तकनीक और संवादात्मक प्रस्तुतियों के जरिए देश की मौखिक और लिखित भाषाई परंपराओं के विकास की यात्रा को दर्शाया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी भाषा हमारी विरासत को आगे बढ़ाती है और भाषाओं के माध्यम से किसी देश की संस्कृति को समझा जा सकता है।’’
शाह ने कहा कि अपनी मातृभाषा सीखने के साथ-साथ प्रत्येक छात्र को देश की सांस्कृतिक विविधता को बेहतर ढंग से समझने के लिए कम से कम एक अन्य भारतीय भाषा भी सीखनी चाहिए।
संग्रहालय का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि यह सदियों से भाषाओं के विकास को प्रदर्शित करके देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
गृह मंत्री ने राष्ट्र निर्माण में पुस्तकालयों के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि देश का भविष्य केवल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि कितने लोग पुस्तकालयों का उपयोग करते हैं।
बंगाल की बौद्धिक विरासत का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस राज्य ने देश को कई महान साहित्यकार, वैज्ञानिक, क्रांतिकारी और विद्वान दिए हैं।
उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और श्री अरविंद के योगदान को याद करते हुए कहा कि दशकों तक बंगाल ने बौद्धिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में भारत का नेतृत्व किया।
शाह ने कहा, ‘‘बंगाल ने भारत को कुछ महानतम प्रतिभाएं दी हैं। श्री अरविंद के जीवन और दर्शन का अध्ययन किए बिना भारत को वास्तव में समझा नहीं जा सकता।’’
उन्होंने विश्वास जताया कि बंगाल एक बार फिर देश का मार्गदर्शन करने वाली शक्ति के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले नौ महीनों से पश्चिम बंगाल की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा हूं। यह राज्य अब देश के लिए प्रकाश स्तंभ के रूप में उभर रहा है।’’
राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार की प्रशंसा करते हुए शाह ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में ‘‘सोनार बांग्ला’’ का सपना साकार होगा।
संग्रहालय का पहला चरण भारत की भाषाई विविधता, विभिन्न लिपियों और समृद्ध साहित्यिक विरासत की विकास यात्रा को दर्शाता है। पारंपरिक संग्रहालय की तरह केवल वस्तुओं का प्रदर्शन करने के बजाय इसे एक सहभागी सांस्कृतिक अनुभव के रूप में विकसित किया गया है। आगंतुकों को आकर्षित करने के लिए इसमें डिजिटल डिस्प्ले, होलोग्राम और ‘मोशन-सेंसर’ जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।
संग्रहालय में नौ दीर्घाएं हैं, जिनमें भाषाओं के इतिहास के विभिन्न पहलुओं और भारत की सभ्यता एवं संस्कृति पर उनके प्रभाव को प्रदर्शित किया गया है। संग्रहालय का उद्देश्य भाषा को एक जीवंत इकाई के रूप में प्रस्तुत करना है, जिसने समय-समय पर समाज को आकार दिया है और खुद भी समाज के साथ निरंतर विकसित होती रही है।
संग्रहालय भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं को समर्पित है। इसमें मौखिक परंपरा से लेकर प्राचीन पांडुलिपियों, मुद्रित पुस्तकों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक पाठ तक भाषाओं के विकास की यात्रा को प्रदर्शित किया गया है, जो देश की समृद्ध और स्थायी भाषाई विविधता को दर्शाती है।
भाषा आशीष नेत्रपाल
नेत्रपाल

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