धर्मेंद्र प्रधान ने निजी क्षेत्र से अनुसंधान और नवाचार में अधिक निवेश करने का आह्वान किया

धर्मेंद्र प्रधान ने निजी क्षेत्र से अनुसंधान और नवाचार में अधिक निवेश करने का आह्वान किया

धर्मेंद्र प्रधान ने निजी क्षेत्र से अनुसंधान और नवाचार में अधिक निवेश करने का आह्वान किया
Modified Date: May 5, 2026 / 01:47 pm IST
Published Date: May 5, 2026 1:47 pm IST

नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को निजी क्षेत्र से अनुसंधान और नवाचार में निवेश बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में उद्योग की अधिक भागीदारी की आवश्यकता है।

प्रधान ने यहां ‘आईआईटी मद्रास टेक्नोलॉजी समिट 2026’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि हालांकि सरकार ने अनुसंधान और विकास के लिए वित्त पोषण में काफी वृद्धि की है, लेकिन इसमें उद्योग के योगदान को बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘भारत में अनुसंधान निवेश का लगभग 70 प्रतिशत वर्तमान में सरकारी धन से आता है। यह सही संकेत नहीं है। हमें सरकार और उद्योग के बीच कम से कम 50-50 प्रतिशत योगदान की आवश्यकता है।’

नवाचार के लिए सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन पर प्रकाश डालते हुए प्रधान ने कहा कि अनुसंधान, विकास और नवाचार के लिए एक लाख करोड़ रुपये का कोष आवंटित किया गया है, जिसमें ‘स्टार्टअप’ को मिलने वाली सहायता भी शामिल है।

प्रधान ने कहा, ‘कुछ साल पहले हमारे देश में केवल कुछ सौ स्टार्टअप थे। अब, हमने ढाई लाख से अधिक स्टार्टअप का आंकड़ा पार कर लिया है।’

उन्होंने कहा कि इसी के साथ देश ‘वैश्विक नवाचार सूचकांक’ में अपनी स्थिति में सुधार करते हुए 85वें से 38वें स्थान पर पहुंच गया है।

मंत्री ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराया और कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ भारतीय मॉडल पर निर्भर करेगा।

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।

उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास की पहलों की सराहना की और कहा कि संस्थानों को समाज के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए और अनुसंधान एवं नवाचार में अपने योगदान को साझा करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘भारत का निर्माण केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है। इसका अर्थ है दुनिया के लिए, विशेष रूप से गरीबों और ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए टिकाऊ समाधान तैयार करना।’

भाषा प्रचेता वैभव

वैभव


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