बेअदबी-रोधी कानून को लेकर सिख विधायक और कैबिनेट मंत्री अकाल तख्त के समक्ष पेश

बेअदबी-रोधी कानून को लेकर सिख विधायक और कैबिनेट मंत्री अकाल तख्त के समक्ष पेश

बेअदबी-रोधी कानून को लेकर सिख विधायक और कैबिनेट मंत्री अकाल तख्त के समक्ष पेश
Modified Date: June 29, 2026 / 01:21 pm IST
Published Date: June 29, 2026 1:21 pm IST

चंडीगढ़, 29 जून (भाषा) पंजाब के सभी सिख विधायक और सिख कैबिनेट मंत्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी रोकथाम कानून के संबंध में स्पष्टीकरण देने के लिए सोमवार को अमृतसर स्थित अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए।

वहीं गैर-सिख कैबिनेट मंत्रियों से इस मामले पर अपने विचार लिखित रूप में देने को कहा गया, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब नहीं किया गया।

जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने 15 जून को सभी दलों के सिख विधायकों और सिख मंत्रियों को अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’को सिख पंथ से सलाह-मशविरा किए बिना पारित किया गया, इसलिए इस पर स्पष्टीकरण आवश्यक है।

अकाल तख्त ने पहले भी पंजाब सरकार से इस कानून की कुछ धाराओं को हटाने की मांग की थी और कहा था ये प्रावधान ‘‘गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और संगत (सिख समुदाय) की भावनाओं के विरुद्ध हैं।’’

यह विधेयक 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

सोमवार को विधायकों की पेशी से पहले पत्रकारों से बातचीत में जत्थेदार गड़गज ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर धार्मिक मामलों और अकाल तख्त के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया और कहा कि बेअदबी कानून के जरिए सरकार गुरु और सिखों के बीच आने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें गुरु पंथ और गुरु ग्रंथ साहिब के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए। हमें सिख पंथ की भावनाओं के अनुरूप चलना चाहिए।’’

अकाल तख्त ने जिन प्रमुख सिख नेताओं को तलब किया, उनमें हरपाल सिंह चीमा, रवजोत सिंह, गुरमीत सिंह खुड्डियां, बलजीत कौर, बलबीर सिंह, हरभजन सिंह, पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां, आप विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल और इंदरबीर सिंह निज्जर, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, कांग्रेस विधायक परगट सिंह, राणा गुरजीत सिंह, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, त्रिप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखपाल सिंह खैरा तथा अकाली विधायक गनीव कौर मजीठिया शामिल हैं।

अकाल तख्त के समक्ष पेश होने से पहले बागी अकाली विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि अकाल तख्त जो भी निर्देश देगा, वह उसका पालन करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि जब जत्थेदार गड़गज ने कानून में संशोधन की आवश्यकता बताई थी, तब राज्य सरकार को उसमें बदलाव कर देना चाहिए था।

वहीं, ‘आप’ विधायक गुरदीत सिंह सेखों ने कहा कि विधायक अकाल तख्त के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट करने आए हैं।

उन्होंने कहा कि यह कानून गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

रविवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि उनकी पार्टी के सिख विधायक और मंत्री अकाल तख्त के समक्ष पेश होंगे और सरकार का पक्ष लिखित रूप में प्रस्तुत करेंगे।

भाषा शोभना संतोष

संतोष


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