West Bengal UCC Bill: राज्य में शादी-तलाक के बदल जाएंगे नियम? UCC बिल पर बड़ा फैसला आज, जानें क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड

West Bengal UCC Bill: सीएम के इस कदम के बाद राज्य में शादी, तलाक, संपत्ति के बंटवारे और उत्तराधिकार जैसे नियमों में बदलाव होगा।

West Bengal UCC Bill: राज्य में शादी-तलाक के बदल जाएंगे नियम? UCC बिल पर बड़ा फैसला आज, जानें क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड

West Bengal UCC Bill/Photo Credit: AI

Modified Date: June 29, 2026 / 01:07 pm IST
Published Date: June 29, 2026 12:53 pm IST
HIGHLIGHTS
  • पश्चिम बंगाल सरकार आज विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक पेश करने जा रही है
  • UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में सभी समुदायों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है
  • इसके लिए विधेयक को विधानसभा से पारित होना, राज्यपाल की मंजूरी मिलना और अधिसूचना जारी होना आवश्यक होगा

कोलकाता। West Bengal UCC Bill: पश्चिम बंगाल में आज समान नागरिक संहिता (UCC) बिल विधानसभा में पेश होने जा रहा है। सीएम शुवेंदु (CM Suvendu Adhikari) अधिकारी के इस कदम के बाद राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, संपत्ति के बंटवारे और उत्तराधिकार जैसे नियमों में बदलाव होगा और यह सबके लिए एक समान हो जाएंगे, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। आपको बता दें कि इससे पहले गुजरात, उत्तराखंड और असम में UCC लागू किया जा चूका है। वहीं आज पश्चिम बंगाल में भी यह नियम लागू होने जा रहा है।

यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है?

यूनिफॉर्म सिविल कोड (West Bengal UCC Bill) कानून में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होती है। इसके तहत शादी, तलाक, बच्चे गोद लेना, संपत्ति का अधिकार, पारिवारिक अधिकार जैसे सभी नागरिक मामलों में समान अधिकार लागू होता है।

जानें यूसीसी बिल का उद्देश्य

West Bengal UCC Bill पश्चिम बंगाल में यूसीसी बिल का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग धर्मों के आधार पर चल रहे कानूनों की जगह पर एक कानूनी व्यवस्था लागू होगी। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य शादी, तलाक और गोद लेने जैसे मामलों के लिए धर्म से अलग एक समान अधिकार बनाना है।

यूसीसी लागू करने वाला बनेगा चौथा प्रदेश

West Bengal UCC Bill  आपको बता दें कि, गुजरात, उत्तराखंड और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल भारत में यूसीसी विधेयक लागू करने वाला चौथा राज्य बनेगा। उत्तराखंड ने सबसे पहले यह बिल लागू किया था।

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सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.