प्रधानमंत्री के दौरे से पहले चर्चा में आया सिंगूर, उद्योग की हालत पर भाजपा-तृणमूल में घमासान

प्रधानमंत्री के दौरे से पहले चर्चा में आया सिंगूर, उद्योग की हालत पर भाजपा-तृणमूल में घमासान

प्रधानमंत्री के दौरे से पहले चर्चा में आया सिंगूर, उद्योग की हालत पर भाजपा-तृणमूल में घमासान
Modified Date: January 14, 2026 / 08:24 pm IST
Published Date: January 14, 2026 8:24 pm IST

सिंगूर (पश्चिम बंगाल), 14 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा और दशा बदल देने वाला सिंगूर करीब दो दशकों बाद 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले फिर चर्चा के केंद्र में है।

उद्योग और जमीन की लड़ाई का मुद्दा जोर पकड़ने के साथ पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस द्वारा चलाए गए भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के कारण टाटा की नैनो कार परियोजना यहां से गुजरात स्थानांतरित हो गई थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 18 जनवरी को सिंगूर के सिंगर भेरी मौजा में होने वाली निर्धारित रैली से पहले राज्य में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। यह मौजा उसी भूखंड का हिस्सा है जिसे कभी कार फैक्टरी के लिए आरक्षित किया गया था।

 ⁠

केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुकांत मजूमदार ने बुधवार को कहा कि सिंगूर बंगाल के “औद्योगिकीकरण के खोए हुए अवसर” का प्रतीक है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर निरंतर राजनीतिक आंदोलन के जरिए निवेशकों को दूर भगाने का आरोप लगाया।

दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा की विरासत का हवाला देते हुए मजूमदार ने इस परियोजना के बंद होने को सिंगूर पर एक ‘धब्बा’ बताया और वादा किया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देकर इसे मिटा दिया जाएगा।

वर्ष 2011 में, सिंगूर और नंदीग्राम के दोहरे आंदोलनों की बदौलत बनर्जी ने वाम मोर्चे के 34 वर्षों के शासन को समाप्त कर दिया। वर्षों बाद, तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कानूनी लड़ाई जीत ली, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने अनिच्छुक किसानों को जमीन वापस करने का आदेश दिया, और यह फैसला पार्टी आज भी नैतिक और कानूनी पुष्टि के रूप में उद्धृत करती है।

हालांकि, भाजपा उसी इतिहास को अपने तरीके से पेश करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के नेताओं का तर्क है कि सिंगूर ने राजनीतिक बदलाव तो लाया, लेकिन इसके साथ ही औद्योगिक ठहराव का युग भी शुरू हुआ।

मजूमदार ने कहा, “नैनो के सिंगूर छोड़ने के बाद बंगाल में एक भी बड़ी औद्योगिक परियोजना नहीं आई। छोटी और मध्यम इकाइयां तो आईं, लेकिन कोई बड़ी फैक्टरी नहीं बनी।’’

भाजपा मोदी की रैली को लेकर काफी उत्साहित है। जिला भाजपा नेताओं ने कहा कि विशाल भीड़ सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां चल रही हैं।

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, “वे उन गांवों में नहीं गए जहां लोगों ने वास्तव में जमीन की लड़ाई लड़ी थी। ये माकपा के पुराने चेहरे हैं जो अब भाजपा में शामिल हो गए हैं।”

राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भाजपा पर उच्चतम न्यायालय के फैसले की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “शीर्ष अदालत ने कहा था कि सिंगूर में जमीन अधिग्रहण गलत था। जब किसानों को पीटा गया और जमीन जबरन ली गई, तब ये नेता कहां थे?”

चुनाव के नजदीक आने के साथ सिंगूर फिर से राजनीतिक चर्चा में लौट आया है, जो याद दिलाता है कि बंगाल में जमीन, उद्योग और सत्ता अटूट रूप से जुड़े हुए हैं।

भाषा आशीष नरेश

नरेश


लेखक के बारे में