एसआईटी को शबरिमला मामले में बरामद सोने की तुलना में कहीं अधिक सोना गायब होने का संदेह
एसआईटी को शबरिमला मामले में बरामद सोने की तुलना में कहीं अधिक सोना गायब होने का संदेह
तिरुवनंतपुरम, एक जनवरी (भाषा) शबरिमला सोना चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने संदेह जताया है कि मंदिर से चोरी हुए सोने की वास्तविक मात्रा, मुख्य आरोपी से बरामद किए गए सोने से कहीं अधिक है।
कोल्लम सतर्कता न्यायालय में एसआईटी द्वारा दायर एक आवेदन में इस संदेह का उल्लेख किया गया, जिसमें मामले के तीन आरोपियों – प्रायोजक उन्नीकृष्णन पोट्टी, स्मार्ट क्रिएशन्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंकज भंडारी और जौहरी गोवर्धन रोड्डम की हिरासत का अनुरोध किया गया है।
हिरासत आवेदन में एसआईटी ने बताया कि साल 2019 में शबरिमला मंदिर के गर्भगृह (श्रीकोविल), स्तंभों और द्वारपालों की मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ाने के लिए 42.100 किलोग्राम वजनी तांबे की प्लेटें मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को सौंपी गई थीं। आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान आरोपियों ने मंदिर का सोना अवैध रूप से निकाल लिया।
हिरासत आवेदन में एसआईटी ने बताया कि आरोपी पंकज भंडारी ने इस काम के बदले शुल्क के रूप में 109.243 ग्राम सोना लेने की बात स्वीकार की, जिसे उसने 25 अक्टूबर 2025 को जांच टीम को सौंपा।
उसने बताया कि सोने की परत चढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान जो सोना निकाला गया था, वह आरोपी गोवर्धन को सौंपा गया था।
गोवर्धन ने 24 अक्टूबर 2025 को एसआईटी के समक्ष 474.960 ग्राम सोना पेश किया और दावा किया कि यह वही मात्रा है जो उसे 2019 में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी से प्राप्त हुई थी।
हालांकि, एसआईटी ने कहा कि जांच से पता चला है कि मूर्तियों, स्तंभों और गर्भगृह के चौखटों पर लगी सोने की परत वाली तांबे की प्लेटों में सोने की मात्रा, भंडारी और गोवर्धन द्वारा पेश किए गए सोने की तुलना में कहीं अधिक थी।
एसआईटी ने अब तक इस मामले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से जुड़े त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के दो पूर्व अध्यक्षों सहित 10 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। केरल उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी को इस महीने तक जांच पूरी करने की समय सीमा दी गई है।
इस बीच, एसआईटी द्वारा संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्च (यूडीएफ) संयोजक अडूर प्रकाश से हुई पूछताछ की खबरों ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।
विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने बृहस्पतिवार को कहा कि उच्च न्यायालय को एसआईटी में दो नए अधिकारियों को नियुक्त करने के फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इन अधिकारियों की नियुक्ति एसआईटी से जानकारी लीक करने के लिए की गई है। माकपा के प्रति झुकाव रखने वाले ये अधिकारी मुख्यमंत्री कार्यालय के दबाव में काम कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि प्रकाश से पूछताछ किए जाने की जानकारी जानबूझकर लीक की गई, जबकि पिछले हफ्ते माकपा नेता कड़कमपल्ली सुरेंद्रन से की गई पूछताछ को पूरी तरह गुप्त रखा गया था।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर सतीशन के दावों का खंडन किया है। बयान में स्पष्ट किया गया कि एसआईटी का गठन केरल उच्च न्यायालय द्वारा किया गया है और इसकी जांच एक खंडपीठ की निगरानी में हो रही है, जिसे जांच की जानकारी बाहर उजागर न करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
दूसरी ओर, माकपा के प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब एसआईटी अडूर प्रकाश से पूछताछ करने वाली है, तब सतीशन ने अपना रुख बदल लिया है और वे एसआईटी पर ही आरोप लगा रहे हैं। वे देख रहे हैं कि शबरिमला सोने का मामला अब उनकी ओर मुड़ रहा है इसलिए वे इससे बचने के उपाय कर रहे हैं।’’
भाषा प्रचेता शफीक
शफीक

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