शिवगिरी मठ ने पिछड़े समुदाय के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया

शिवगिरी मठ ने पिछड़े समुदाय के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया

शिवगिरी मठ ने पिछड़े समुदाय के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया
Modified Date: March 14, 2026 / 03:34 pm IST
Published Date: March 14, 2026 3:34 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 14 मार्च (भाषा) शिवगिरी मठ के प्रमुख स्वामी सच्चिदानंद ने शनिवार को दावा किया कि राजनीतिक दल चुनाव में पिछड़े समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दे रहे हैं।

उन्होंने एसएनडीपी योगम के नेतृत्व को अयोग्य घोषित करने वाले केरल उच्च न्यायालय के फैसले का भी स्वागत किया।

शिवगिरी मठ एझवा समुदाय का एक आध्यात्मिक केंद्र है। यह समुदाय केरल के पिछड़े समुदायों में संख्या की दृष्टि से मजबूत है।

श्री नारायण धर्म संगम ट्रस्ट के अध्यक्ष सच्चिदानंद ने प्रेसवार्ता में कहा कि उन्हें पिछड़े वर्ग के समुदायों से चुनाव में प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।

उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायतें सुनने के बाद मठ ने हस्तक्षेप करने का फैसला किया।

सच्चिदानंद ने कहा, ‘‘श्रीनारायण समुदाय से केरल में अब केवल एक ही विधायक हैं। जब पहली कांग्रेस सरकार सत्ता में आई थी, तब आर शंकर मुख्यमंत्री थे।’’

आर शंकर एझवा समुदाय के सदस्य थे।

सच्चिदानंद ने कहा कि न केवल कांग्रेस बल्कि सभी राजनीतिक दल पिछड़े समुदायों पर पर्याप्त ध्यान देने में विफल रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘के करुणाकरण और ए के एंटनी के शासनकाल तक सभी समुदायों को समान महत्व देने की नीति थी। लेकिन उनके कार्यकाल के बाद, पिछड़े समुदायों के उम्मीदवारों को जीतने योग्य निर्वाचन क्षेत्र नहीं दिए जा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि केरल की अधिकांश आबादी एझवा, धीवर, विश्वकर्मा और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समूहों जैसी समुदायों से संबंधित है।

सच्चिदानंद ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की शिवगिरी मठ की यात्रा के दौरान उनसे सभी समुदायों के लोगों के लिए समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा कि यही अनुरोध मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेतृत्व के समक्ष भी रखा गया था।

आध्यात्मिक नेता ने केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले का भी स्वागत किया, जिसमें कंपनी अधिनियम के तहत वैधानिक आवश्यकताओं का अनुपालन न करने के कारण श्री नारायण धर्म परिपालना (एसएनडीपी) योगम के सभी पदाधिकारियों और पूरे निदेशक मंडल को, जिसमें इसके महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन भी शामिल हैं, अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

भाषा धीरज राजकुमार

राजकुमार


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