प्रधानमंत्री आवास के पास से हटाई जाने वाली झुग्गियों के लोगों ने राहुल गांधी से मुलाकात कर मांगी मदद
प्रधानमंत्री आवास के पास से हटाई जाने वाली झुग्गियों के लोगों ने राहुल गांधी से मुलाकात कर मांगी मदद
नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित तीन झुग्गी बस्तियों के लोगों ने शनिवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर दिल्ली के बाहरी इलाके सावदा घेवरा में प्रस्तावित पुनर्वास नीति के खिलाफ हस्तक्षेप की मांग की।
इन लोगों का कहना है कि इस कदम से उनकी आजीविका, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच प्रभावित होगी।
भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी कॉलोनी के निवासी 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस कार्यालय पहुंचे।
उन्होंने दावा किया कि इन तीनों बस्तियों में रहने वाले करीब 717 परिवार इस फैसले से प्रभावित होंगे।
इन झुग्गियों में लगभग 3,000 से 5,000 लोग रहते हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को इन निवासियों को अपनी झुग्गियां खाली करने और सावदा घेवरा में वैकल्पिक आवास में जाने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था।
अदालत ने बेदखली की प्रक्रिया को दिल्ली झुग्गी एवं झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति, 2015 का उल्लंघन बताने के याचिकाकर्ताओं के दावे को भी खारिज कर दिया था।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने झुग्गीवासियों के पुनर्वास की निगरानी के लिए एक समिति भी गठित की।
अदालत ने कहा कि अधिकारी सावदा घेवरा में उन्हें स्कूल, बिजली, एलपीजी कनेक्शन, बस पास, डिस्पेंसरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं तथा चार जून के अदालत के निर्देशों का ‘‘सख्ती से’’ पालन करेंगे।
केंद्र सरकार ने इन झुग्गी बस्तियों को हटाने का अनुरोध करते हुए कहा था कि ये बस्तियां संरक्षित क्षेत्र में हैं और इनके ठीक बगल में वायुसेना का एक सक्रिय केंद्र है।
सरकार ने कहा था कि क्षेत्र में अवैध निर्माण हटाने का फैसला रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक एवं सुरक्षा उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
झुग्गी निवासी शाहनवाज ने ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा से कहा, ‘‘हम राहुल गांधी जी के कार्यालय इसलिए आए हैं क्योंकि हमारे घर तोड़े जा रहे हैं। हम अपनी परेशानियां और समस्याएं उनके सामने रखना चाहते हैं। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने हमारी याचिका खारिज कर दी है और हमें सावदा घेवरा जाने का निर्देश दिया है।’’
प्रस्तावित पुनर्वास ऐसे समय में किया जा रहा है, जब इलाके में दिल्ली रेस क्लब के ढांचों को हटाने की कार्रवाई जारी है।
अदालत के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को क्लब परिसर का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था।
निवासियों ने कहा कि उन्हें करीब 45 किलोमीटर दूर सावदा घेवरा भेजे जाने से उनका रोजगार और बच्चों की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
एक अन्य निवासी ने कहा, ‘‘हमें सावदा घेवरा भेजा जा रहा है, जो 45 किलोमीटर दूर है। हमारे बच्चों को शिक्षा की सुविधा नहीं मिल पाएगी और हमारे लिए रोजगार के अवसर भी नहीं होंगे। हम इतनी दूर कैसे जा सकते हैं?’’
निवासियों ने दावा किया कि वे पुनर्वास के खिलाफ नहीं हैं लेकिन वे चाहते हैं कि उन्हें उनके मौजूदा घरों के पास ही वैकल्पिक आवास दिया जाए।
निवासी ने कहा, ‘‘हम जाने से इनकार नहीं कर रहे हैं। अगर सरकार को इस जमीन की जरूरत है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। हम स्थानांतरित होने के लिए तैयार हैं लेकिन हमारे साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए। हम वहां करीब 100 साल से रह रहे हैं।’’
उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें एक ऐसी नीति के बारे में बताया गया था, जिसके तहत पुनर्वास के लिए आवास या तो मौजूदा स्थान पर या फिर करीब तीन से पांच किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध कराया जाना था।
निवासियों ने सफदरजंग अस्पताल और पास के एक बालिका विद्यालय समेत जरूरी सुविधाओं तक पहुंच को लेकर चिंता जताई।
उनका कहना है कि शहर के बाहरी इलाके में स्थानांतरित किए जाने से वे इन सुविधाओं से दूर हो जाएंगे।
एक अन्य निवासी ने कहा, ‘‘अगर किसी को सुबह पांच बजे काम पर पहुंचना हो तो वह 45 किलोमीटर दूर से कैसे आएगा? वहां न रोजगार है और न ही आजीविका कमाने का कोई साधन।’’
निवासियों ने प्रस्तावित पुनर्वास स्थल पर महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस इलाके में नशे, शराब और अपराध से जुड़ी समस्याएं हैं।
निवासियों ने कहा कि उन्होंने अपनी चिंताएं रखने के लिए सरकारी अधिकारियों से संपर्क किया था लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।
निवासियों ने राहुल गांधी से इस मामले को अधिकारियों के समक्ष उठाने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि किसी भी पुनर्वास योजना में उनकी आजीविका, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखा जाए।
भाषा जितेंद्र माधव
माधव

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