तिरुवनंतपुरम, 14 अक्टूबर (भाषा) सबरीमला मंदिर में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में आए टीडीबी ने मंगलवार को कहा कि कुछ समूह जानबूझकर उसे बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं और इस तरह उसके प्रशासन के तहत आने वाले 1,252 मंदिरों को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
मंदिर समिति ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई अत्यंत निंदनीय है।
त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के अध्यक्ष पी एस प्रशांत ने यहां मुख्यालय में बोर्ड की बैठक के बाद कहा कि बोर्ड का दृढ़ विश्वास है कि जिन लोगों ने गलतियां की हैं उन्हें दंडित किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ अनुकरणीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए लेकिन झूठे प्रचार के माध्यम से देवस्वओम बोर्ड को बदनाम करने और उसके मंदिरों की छवि धूमिल करने का प्रयास निंदनीय हैं।’
सबरीमला में सोना चढ़ाने से संबंधित आरोपों की उच्च न्यायालय की निगरानी में एसआईटी द्वारा की जा रही जांच पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि टीडीबी और देवस्वओम बोर्ड दोनों ने पहले ही इसका स्वागत किया है।
प्रशांत ने कहा कि अदालत ने एसआईटी (विशेष कार्य बल) को रिपोर्ट सौंपने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। विपक्ष के नेता वी डी सतीशन और मीडिया से अनुरोध है कि वे सच्चाई को समझने के लिए तब तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करें।
उन्होंने आगामी वार्षिक तीर्थयात्रा सत्र को सफल बनाने के लिए सभी से सहयोग मांगा, जिसके दौरान सबरीमला में लगभग 60 लाख तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है।
आरोपों के संबंध में टीडीबी द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में उन्होंने कहा कि एक और अधिकारी सुनील कुमार को निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि घोटाले में कथित रूप से शामिल लेकिन सेवानिवृत्त हो चुके ऐसे अधिकारियों से भी स्पष्टीकरण मांगने के लिए कदम उठाए गए हैं।
इस मामले के संबंध में हाल ही में एक अन्य अधिकारी मुरारी बाबू को निलंबित कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि भगवान अयप्पा की संपत्ति का नुकसान दुखद है, भले ही इसमें थोड़ी मात्रा में सोना ही क्यों न शामिल हो।
उन्होंने कहा कि टीडीबी ने सबरीमला से लेकर छोटे मंदिरों तक सभी अनुष्ठानों के निष्ठापूर्वक पालन तथा त्योहारों और समारोहों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
टीडीबी अध्यक्ष ने बाद में एक बयान में कहा, ‘इन तथ्यों के बावजूद कुछ समूह जानबूझकर त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड को बदनाम करने, उस पर संदेह पैदा करने और इस तरह उसके प्रशासन के अंतर्गत आने वाले 1,252 मंदिरों की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह के कृत्य बेहद निंदनीय है।’
उन्होंने कहा कि कुछ ताकतों द्वारा सदियों पुरानी मंदिर परंपराओं और मान्यताओं को कमजोर करने के वर्तमान प्रयास एक ‘दुर्भावनापूर्ण षड्यंत्र’ से कम नहीं हैं, जो लाखों भक्तों की भावनाओं को गहरा आघात पहुंचाते हैं।
अध्यक्ष ने कहा कि 1,252 मंदिरों में 6,000 से अधिक कर्मचारी, 5,000 से अधिक पेंशनभोगी (पारिवारिक पेंशनभोगी सहित) और हजारों परिवार हैं जो अपनी आजीविका के लिए मंदिर प्रशासन पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि देवस्वओम बोर्ड या उसके मंदिरों को नुकसान पहुंचाने का कोई भी प्रयास उन सभी को प्रभावित करेगा।
प्रशांत ने कहा, ‘कुछ समूहों ने तो उच्च न्यायालय की प्रत्यक्ष निगरानी में की जा रही जांच पर भी अविश्वास का रुख अपना लिया है, जो अस्वीकार्य है।’
बयान में कहा गया है कि इसलिए त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड सभी संबंधित पक्षों से अपील करता है कि वे उचित जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आने तक बोर्ड के खिलाफ झूठा प्रचार करने से बचें।
केरल उच्च न्यायालय ने मंदिर में द्वारपालक (संरक्षक देवता) की मूर्तियों पर लगे सोने से मढ़े तांबे की प्लेटों के वजन में कमी को देखते हुए पहले ही जांच का आदेश दिया था।
शुक्रवार को अदालत ने राज्य पुलिस को मंदिर के ‘साइड फ्रेम’ से सोने की संदिग्ध हेराफेरी के संबंध में आपराधिक मामला दर्ज करने और जांच शुरू करने का निर्देश दिया।
भाषा सुमित नरेश
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