जोधपुर, 31 जनवरी (भाषा) कार्यकर्ता और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के चिकित्सा जांच के लिए जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) लाया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
वांगचुक, 27 सितंबर, 2025 से जोधपुर केंद्रीय कारागार में हैं।
अधिकारियों ने बताया कि वांगचुक ने अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में लगभग डेढ़ घंटा बिताया।
एम्स सूत्रों के अनुसार, वांगचुक को पेट संबंधी समस्याएं थीं और वह शुक्रवार को भी जांच के लिए अस्पताल आए थे।
उच्चतम न्यायालय ने वांगचुक की चिकित्सा रिपोर्ट दो फरवरी तक प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
न्यायालय वर्तमान में वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
अधिकारी ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद शनिवार सुबह पुलिस वांगचुक को जोधपुर केंद्रीय कारागार से एम्स अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाई।
वांगचुक जेल में काफी समय से अपनी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जता रहे थे।
न्यायालय ने वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए बृहस्पतिवार को जोधपुर जेल प्रशासन को किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से उनकी जांच कराने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने बृहस्पतिवार की सुनवाई के दौरान जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वांगचुक की जांच किसी सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट) से कराई जाए।
राजस्थान सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने सुनवाई के दौरान बताया कि जेल के चिकित्सकों ने पिछले चार महीनों में वांगचुक की 21 बार जांच की है और आखिरी जांच 26 जनवरी को हुई थी।
वांगचुक के वकील कपिल सिब्बल ने इस बात का विरोध करते हुए दावा किया कि जेल के पानी की गुणवत्ता खराब होने के कारण वांगचुक को लगातार पेट दर्द हो रहा है।
न्यायालय ने सिब्बल की दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि मरीज की जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ से चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष