अपने संस्मरण में निजी और राजनीतिक जीवन के बारे में बताएंगी सोनिया गांधी

अपने संस्मरण में निजी और राजनीतिक जीवन के बारे में बताएंगी सोनिया गांधी

अपने संस्मरण में निजी और राजनीतिक जीवन के बारे में बताएंगी सोनिया गांधी
Modified Date: August 18, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: August 18, 2026 10:36 pm IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (एपी) इस साल नवंबर में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की एक किताब आ रही है जिसमें वह भारत के नेहरू-गांधी राजनीतिक परिवार का हिस्सा बनने से जुड़ी बातों और त्रासदियों के साथ-साथ सरकार में अपने कामकाज के बारे में स्मृतियों को साझा करेंगी।

किताब के प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ ने मंगलवार को घोषणा की कि सोनिया गांधी की किताब ‘बिलांगिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को बाजार में आएगी।

अल्फ्रेड ए. नॉफ अमेरिका में पेंगुइन रैंडम हाउस का एक इम्प्रिंट है। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने हालांकि भारत में किताब जारी करने की तारीख की पुष्टि नहीं की है।

नॉफ की वेबसाइट के अनुसार संस्मरण की शुरुआत इंग्लैंड के संस्थान कैंब्रिज से होती है जहां 1965 में 19 साल की छात्रा सोनिया माइनो ‘‘को पहली ही नज़र में उस खूबसूरत नौजवान से प्यार हो जाता है, जिसे नियति ने उनके पति के रूप में चुना था। वह थे राजीव गांधी।’’

सार्वजनिक रूप से अपने निजी जीवन के बारे में बहुत कम ही बात करने वालीं सोनिया (79) इस किताब में ‘‘युद्ध के बाद के इटली में अपने बचपन से लेकर अपने प्रेम-प्रसंग और उसकी वजह से भारत आने तक’’ की कहानी का वर्णन किया है।

पुस्तक में इस बात का भी विवरण मिलेगा कि किस तरह सोनिया गांधी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नीत गठबंधन की जीत के बाद प्रधानमंत्री बनने की पेशकश नहीं स्वीकार की थी और मनमोहन सिंह को सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुना था।

नॉफ के माध्यम से जारी एक बयान में सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम ही ऐसी बातें सामने आईं जो उनके इरादों, उनके कामों और उनकी मानवीय कमियों की सच्चाई तक पहुंच पाईं। कई मायनों में, यह किताब उनके मानवीय पक्ष को सम्मान देने वाली है। मेरी कहानी पाठकों को उन सामाजिक और राजनीतिक बदलावों का एक अनोखा नजरिया भी देती है, जिन्हें मैंने अपने इस प्यारे देश में छह दशकों तक देखा है।’’

सोनिया मूल रूप से इटली की रहने वाली हैं। इस किताब में वह लिखती हैं कि कैसे 1984 में उनकी सास की हत्या के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। इंदिरा के उत्तराधिकारी के तौर पर उनकी जगह राजीव गांधी ने ली, जिनकी सात साल बाद हत्या कर दी गई। बाद में वह (सोनिया) खुद भी राजनीति में आईं और कांग्रेस पार्टी की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं। हालांकि सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने के पार्टी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। 2014 में उनकी पार्टी (कांग्रेस) सत्ता से बाहर हो गई और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी।

सोनिया ने अपने बयान में कहा, ‘‘इस हृदय विदारक घटना और व्यक्तिगत नुकसान के अहसास ने ही मुझे राजनीति की सार्वजनिक दुनिया में धकेल दिया। उससे पहले तक मैंने अपनी निजता को बहुत संभालकर रखा था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अपने जीवन के बारे में लिखना मेरे लिए आसान नहीं था। इसका मतलब था उन पलों और अनुभवों को साझा करना जिन्हें मैंने हमेशा अपने मन में गहराई से छिपाकर रखा था।’’

भाषा वैभव पवनेश

पवनेश


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