असहमति दबाने के लिए विशेष कानूनों का हो रहा दुरुपयोग : कांग्रेस ने असम में आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता पर रासुका लगाने पर कहा

असहमति दबाने के लिए विशेष कानूनों का हो रहा दुरुपयोग : कांग्रेस ने असम में आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता पर रासुका लगाने पर कहा

असहमति दबाने के लिए विशेष कानूनों का हो रहा दुरुपयोग : कांग्रेस ने असम में आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता पर रासुका लगाने पर कहा
Modified Date: August 2, 2026 / 01:31 pm IST
Published Date: August 2, 2026 1:31 pm IST

नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने असम सरकार द्वारा आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिए जाने पर रविवार को आरोप लगाया कि डोले के खिलाफ इस कानून का इस्तेमाल भाजपा सरकारों द्वारा असहमति की आवाज को दबाने के लिए कठोर कानूनों को ‘‘हथियार’’ की तरह इस्तेमाल करने की बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है।

कांग्रेस ने कहा कि यह एहतियातन हिरासत संबंधी कानूनों का खुला दुरुपयोग और राज्य सरकार द्वारा ‘‘अधिकारों का अतिक्रमण’’ है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि 30 जुलाई को असम सरकार ने प्रणब डोले के खिलाफ रासुका लगाया, जबकि उससे ठीक एक दिन पहले जिला अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एहतियातन हिरासत संबंधी कानूनों का खुला दुरुपयोग और राज्य सरकार द्वारा अधिकारों का अतिक्रमण है।’’

रमेश ने कहा कि डोले को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि उन्होंने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के निकट प्रस्तावित पांच सितारा रिसॉर्ट के विरोध में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का समर्थन किया था। इस परियोजना को असम के मुख्यमंत्री का समर्थन प्राप्त है।

उन्होंने कहा कि 2022 से गोलाघाट जिले के मूल निवासी इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की थी। उनका आरोप है कि उनकी जमीन जबरन अधिग्रहित की गई।

रमेश ने कहा कि 29 जुलाई को जमानत देते समय सत्र अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि ‘‘जहां पर्यावरण संरक्षण और मूल निवासियों के अस्तित्व का प्रश्न जुड़ा हो, वहां स्थानीय लोगों की वास्तविक चिंताओं को दबाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि असम सरकार ने रासुका लगाकर ठीक वही करने की कोशिश की, जिसके खिलाफ अदालत ने टिप्पणी की थी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि डोले के खिलाफ जारी रासुका हिरासत आदेश अस्पष्ट और अनुमान आधारित आरोपों पर टिका है। इनमें यह आरोप भी शामिल है कि उन्होंने ‘‘संदिग्ध स्रोतों से संदिग्ध विदेशी लेनदेन’’ किए। उन्होंने कहा कि यह मोदी सरकार की चिर परिचित कार्यशैली है।

उन्होंने कहा, ‘‘डोले के खिलाफ रासुका का इस्तेमाल भाजपा सरकारों द्वारा असहमति की आवाज को दबाने के लिए विशेष अधिकार देने वाले कानूनों को हथियार बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है।’’

रमेश ने कहा कि इसी तरह की घटनाएं उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिलीं, जहां नोएडा में शोषणकारी कार्य परिस्थितियों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले श्रमिक अधिकार कार्यकर्ताओं पर भी रासुका लगाया गया था।

उन्होंने कहा कि देशभर की भाजपा सरकारें मजदूरों, मूल निवासियों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की वैध शिकायतों को गिरफ्तारियों और कठोर कानूनों के जरिए दबा नहीं सकतीं।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘असम सरकार कानून के शासन और लोकतांत्रिक असहमति के प्रति पूरी तरह उपेक्षा का रवैया अपना रही है। उच्चतम न्यायालय और कई उच्च न्यायालय बार-बार यह कह चुके हैं कि एहतियातन हिरासत संबंधी कानूनों का इस्तेमाल जमानत देने वाले न्यायिक आदेशों को निष्प्रभावी करने या किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक जेल में रखने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।’’

रमेश की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित पांच सितारा होटल के विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में जमानत मिलने के अगले ही दिन डोले को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में ले लिया गया।

इससे पहले शनिवार को कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए कहा था कि इससे स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार असहमति को बर्दाश्त नहीं करती।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने गुवाहाटी में गायक जुबिन गर्ग की भित्तिचित्र को लेकर कलाकारों के खिलाफ भी रासुका लगाने की धमकी दी थी।

गुवाहाटी से 13 जुलाई को गिरफ्तार किए गए डोले को गोलाघाट जिला जेल में रखा गया था। जून में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में उन्हें बुधवार को अदालत से जमानत मिल गई थी।

हालांकि, राज्य सरकार ने अगले ही दिन यानी बृहस्पतिवार को उनके खिलाफ रासुका लागू कर दिया, जिससे उनकी उसी जेल में हिरासत जारी रही। यह जानकारी सरकारी आदेश में दी गई है।

भाषा गोला रंजन

रंजन


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