जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने पहलगाम हमला जांच में चीन को ‘लेटर रोगेटरी’ जारी किया

जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने पहलगाम हमला जांच में चीन को ‘लेटर रोगेटरी’ जारी किया

जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने पहलगाम हमला जांच में चीन को ‘लेटर रोगेटरी’ जारी किया
Modified Date: March 3, 2026 / 07:43 pm IST
Published Date: March 3, 2026 7:43 pm IST

जम्मू, तीन मार्च (भाषा) जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने चीन के सक्षम न्यायिक अधिकरण को ‘लेटर रोगेटरी’ (अनुरोध-पत्र) जारी किया है, ताकि पिछले साल के पहलगाम आतंकवादी हमले की जांच से जुड़े एक मोबाइल फोन की आपूर्ति शृंखला और अंतिम उपयोगकर्ता की जानकारी प्राप्त की जा सके।

‘लेटर रोगेटरी’ एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी पत्र होता है, जिसे किसी देश की अदालत द्वारा दूसरे देश की अदालत से सहायता के लिए भेजा जाता है, खासकर तब जब किसी मामले में साक्ष्य इकट्ठा करना या गवाह से पूछताछ करना आवश्यक हो।

राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत के न्यायाधीश ने अनुरोध-पत्र के रूप में यह आदेश जांच एजेंसी के उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) संदीप चौधरी द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 112 के तहत दायर याचिका के जवाब में पारित किया।

पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकवादियों ने 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम स्थित एक पर्यटन स्थल पर हमला किया, जिसमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय गाइड मारे गए।

याचिका के अनुसार, इस मामले की जांच के दौरान एनआईए ने आतंकवादी हमले की साजिश और क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न सामान और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।

ऐसे एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में ‘गोप्रो हीरो 12 ब्लैक’ कैमरा शामिल है। इसके बारे में जानकारी हासिल करना पहलगाम हमले में शामिल आतंकवादी मॉड्यूल की हमले से पहले की जांच, उनकी गतिविधियों और संचालन की तैयारी स्थापित करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

उक्त उपकरण की आपूर्ति और उसे चालू (एक्टिवेट) किये जाने से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए निर्माता गोप्रो बीवी को बीएनएसएस के तहत एक वैधानिक नोटिस जारी किया गया।

अपने आधिकारिक जवाब में, गोप्रो बीवी ने जानकारी दी कि उक्त कैमरे की आपूर्ति एई ग्रुप इंटरनेशनल लिमिटेड को की गयी थी, जो चीन की एक वितरक कंपनी है। इस कैमरे को 30 जनवरी 2024 को चीन के डोंगगुआन में पहली बार चालू किया गया था।

अदालत ने कहा कि चूंकि भारत और चीन इस विषय पर किसी भी पारस्परिक संधि, यानी ‘‘म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी/एग्रीमेंट’’ (एमएलएटी) के सदस्य नहीं हैं, इसलिए इस स्थिति में अनुरोधित सहायता ‘‘अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध को लेकर संयुक्त राष्ट्र की संधि’’ (यूएनटीओसी) के तहत मांगी जा सकती है, क्योंकि दोनों देशों ने इस संधि को स्वीकार किया है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि गृह मंत्रालय ने मामले की जांच में कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए चीन को ‘लेटर रोगेटरी’ जारी करने की सहमति दे दी है।

अदालत ने उपयुक्त कूटनीतिक माध्यमों से चीनी भाषा में अनूदित प्रतियों को अपलोड और अग्रेषित करने के लिए प्रक्रिया संबंधी निर्देश भी जारी किए।

याचिका को निस्तारित कर दिया गया और इसे मुख्य मामले की फाइल का हिस्सा बना दिया गया, साथ ही आदेश की एक प्रति अनुपालन के लिए एनआईए को भेज दी गई।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश


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