विस चुनाव से पहले शिअद-भाजपा गठबंधन की अटकलें, पुरी बोले-‘छोटे भाई’ की भूमिका स्वीकार नहीं

विस चुनाव से पहले शिअद-भाजपा गठबंधन की अटकलें, पुरी बोले-‘छोटे भाई’ की भूमिका स्वीकार नहीं

विस चुनाव से पहले शिअद-भाजपा गठबंधन की अटकलें, पुरी बोले-‘छोटे भाई’ की भूमिका स्वीकार नहीं
Modified Date: June 13, 2026 / 07:06 pm IST
Published Date: June 13, 2026 7:06 pm IST

चंडीगढ़/लुधियाना, 13 जून (भाषा) शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संभावित गठबंधन को लेकर अटकलों के बीच, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को कहा कि भाजपा कभी भी ‘छोटे भाई’ की भूमिका स्वीकार नहीं करेगी और इस बात पर बल दिया कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल देश और दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है।

पुरी का यह बयान शिअद के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल द्वारा भाजपा के साथ संभावित गठबंधन की अटकलों को खारिज करने के कुछ दिनों बाद आया है। बादल ने कहा था कि उनका ध्यान अपनी पार्टी को मजबूत करने पर है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के कई नेता विधानसभा की सभी 117 सीट पर अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं।

पुरी ने लुधियाना में संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस समय भाजपा भारत और दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। अगर कोई यह सोचता है कि गठबंधन में आकर हम छोटे भाई भूमिक में रहेंगे तो ऐसा नहीं होगा।’’

अमृतसर में एक अलग कार्यक्रम में जब केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से शिअद गठबंधन की अटकलों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘‘यह नीतिगत मामला है। हमारी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व विचार-विमर्श से तय करेगा कि क्या रणनीति बनानी है। और रणनीति को तय होने से पहले उजागर नहीं किया जा सकता।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा सभी 117 विधानसभा सीट पर अकेले लड़ने में सक्षम है, तो मनोहर लाल ने पश्चिम बंगाल में पार्टी की चुनावी सफलता का उदाहरण दिया जहां भाजपा ने अकेले लड़कर 207 सीट जीती थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘हरियाणा में भी हमने 2014 में अकेले चुनाव लड़ा और बहुमत हासिल किया।’’

मंत्री ने यह भी कहा, ‘‘यह सोचना कि हम अकेले लड़कर बहुमत नहीं ला सकते, यह (गठबंधन का) कारण नहीं है। लेकिन देश और राज्य के हित में जो होगा, वह हमारी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा।’’

शिअद ने सितंबर 2020 में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के विरोध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से नाता तोड़ लिया था, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा केवल दो सीट जीत सकी, जबकि अकाली दल का प्रदर्शन अब तक का सबसे खराब रहा और वह मात्र तीन सीट ही जीत पाया।

भाषा

खारी रंजन

रंजन


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