हितधारकों ने तेजपुर विश्वविद्यालय में जारी संकट की जांच के लिए गठित समिति का स्वागत किया

हितधारकों ने तेजपुर विश्वविद्यालय में जारी संकट की जांच के लिए गठित समिति का स्वागत किया

हितधारकों ने तेजपुर विश्वविद्यालय में जारी संकट की जांच के लिए गठित समिति का स्वागत किया
Modified Date: January 2, 2026 / 05:27 pm IST
Published Date: January 2, 2026 5:27 pm IST

तेजपुर (असम), दो जनवरी (भाषा) असम के तेजपुर विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों ने संस्थान में जारी संकट की स्थिति से संबंधित सभी मामलों की जांच के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित की गई समिति का स्वागत किया है, जिनमें कुलपति पर लगे आरोपों की जांच भी शामिल है।

हितधारकों ने हालांकि यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में आंदोलन तब तक पूरी तरह से वापस नहीं लिया जाएगा जब तक कि समिति के निष्कर्ष ‘‘न्याय को निर्णायक रूप से बरकरार नहीं रखते और जब तक परिणाम हितधारकों के पक्ष में नहीं आते’’।

असम के सोनितपुर जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय में कुलपति शंभूनाथ सिंह द्वारा कथित अनियमितताएं किए जाने के विरोध में सितंबर के मध्य से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को अपने आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर 24 घंटे की भूख हड़ताल की।

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शिक्षा मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक आदेश में सिंह को छुट्टी पर जाने के लिए कहा और उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का आदेश दिया।

सभी हितधारकों – तेजपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (टीयूटीए), तेजपुर विश्वविद्यालय गैर-शिक्षण कर्मचारी संघ (टीयूएनटीईए) और छात्रों ने एक बयान जारी कर कहा कि लंबे समय से जारी संकट को दूर करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदम का स्वागत है।

उन्होंने कहा कि इसमें संकट से जुड़े सभी आरोपों और परिस्थितियों की निष्पक्ष रूप से जांच होनी चाहिए तथा अंततः न्याय मिलना चाहिए और कुलपति को पद से हटाया जाना चाहिए।

सभी संबंधित पक्षों ने जांच समिति को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और साथ ही नवनियुक्त उपकुलपति (प्रो वीसी) का परिसर में स्वागत करने की इच्छा भी व्यक्त की।

शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के डिजाइन विभाग के अमरेंद्र कुमार दास को तेजपुर विश्वविद्यालय का उपकुलपति नियुक्त किया है।

तीन सदस्यीय जांच समिति से अधिकतम तीन महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

भाषा

नेत्रपाल रंजन

रंजन


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