‘इंडिया’ गठबंधन के संयोजक पद के लिए स्टालिन सबसे उपयुक्त नेता: मणिशंकर अय्यर

‘इंडिया’ गठबंधन के संयोजक पद के लिए स्टालिन सबसे उपयुक्त नेता: मणिशंकर अय्यर

‘इंडिया’ गठबंधन के संयोजक पद के लिए स्टालिन सबसे उपयुक्त नेता: मणिशंकर अय्यर
Modified Date: February 23, 2026 / 03:04 pm IST
Published Date: February 23, 2026 3:04 pm IST

नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने सोमवार को कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के संयोजक बनने के लिए सबसे उपयुक्त हैं।

अय्यर ने इस बात पर जोर दिया कि एक प्रमुख घटक की तुलना में एक छोटे घटक को इस तरह की जिम्मेदारी दिए जाने से गठबंधन की एकता और मजबूत होगी।

मौजूदा समय में चेन्नई में मौजूद अय्यर ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मौजूदा परिस्थितियों में और 2029 के लक्ष्य को देखते हुए ‘इंडिया’ का नेतृत्व करने के लिए स्टालिन से बेहतर कोई नहीं है।”

उन्होंने स्टालिन का नाम सुझाने के पीछे की वजहों के बारे में विस्तार से बताया।

अय्यर ने कहा कि केवल एक मजबूत ‘इंडिया’ ही 2029 के आम चुनाव में जीत सुनिश्चित कर सकता है, जिसके बिना राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।

उन्होंने कहा कि केवल स्टालिन ही राष्ट्रीय स्तर पर इस गठबंधन को मजबूती की ओर ले जा सकते हैं, जबकि उनके बेटे उदयनिधि और अन्य सहयोगी आगामी चुनावों में जीत के बाद राज्य सरकार चला सकते हैं।

अय्यर ने यह भी तर्क दिया कि कांग्रेस बिना किसी संदेह के गठबंधन की प्रमुख घटक है, इसलिए उसे स्टालिन को संयोजक बनाए जाने को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रमुख घटक की तुलना में छोटा घटक गठबंधन की एकता के लिए ज्यादा उपयुक्त है।

अय्यर ने कहा कि द्रमुक वर्षों से कांग्रेस की सबसे विश्वसनीय सहयोगी रही है और स्टालिन ने खुद को एक असाधारण प्रशासक साबित किया है, जो जानते हैं कि आम सहमति कैसे बनाई जाती है।

अय्यर की यह टिप्पणी कांग्रेस के साथ उनके टकराव के बीच आई है।

इस टकराव की शुरुआत पिछले हफ्ते उस समय हुई थी, जब तिरुवनंतपुरम में अय्यर ने कहा था कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन एक बार फिर केरल के मुख्यमंत्री बनेंगे।

कांग्रेस ने अय्यर की टिप्पणी से खुद को अलग करते हुए कहा था कि पिछले कुछ वर्षों से उनका पार्टी से कोई संबंध नहीं है और वह पूरी तरह से अपनी व्यक्तिगत हैसियत में बोलते और लिखते हैं।

भाषा

हक हक पारुल

पारुल


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