न्यायालय ने यूएई के 500 करोड़ रुपये के धन संबंधी आदेश पर पूर्व प्रधान ललित को मध्यस्थ नियुक्त किया
न्यायालय ने यूएई के 500 करोड़ रुपये के धन संबंधी आदेश पर पूर्व प्रधान ललित को मध्यस्थ नियुक्त किया
नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने यूएई की अदालत द्वारा रास अल खैमाह इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (राकिया) के पक्ष में और हैदराबाद के उद्योगपति निम्मगड्डा प्रसाद के खिलाफ दिए गए 500 करोड़ रुपये के आदेश से जुड़े विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए पूर्व प्रधान न्यायाधीश यू यू ललित को सोमवार को मध्यस्थ नियुक्त किया।
राकिया संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक दीवानी फैसले को लागू करवाने की कोशिश कर रही है, जिसके तहत उसे 267,941,374 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 543 करोड़ रुपये मूलधन और ब्याज सहित 643 करोड़ रुपये) का भुगतान करना होगा। यह मामला आंध्र प्रदेश में बंदरगाह और हवाई अड्डे के विकास के लिए 2008 में शुरू असफल संयुक्त उद्यम ‘वैनपिक प्रोजेक्ट’ से जुड़ा है।
राकिया का आरोप है कि प्रसाद ने राकिया के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) खाटर मस्साद के साथ मिलकर परियोजना के लिए आवंटित 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर का गबन किया।
सोमवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को प्रसाद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने बताया कि उद्योगपति ने पहले दिए गए निर्देशानुसार 125 करोड़ रुपये नकद जमा कर दिए हैं।
वरिष्ठ वकील ने यह भी बताया कि तेलंगाना में स्थित 37 एकड़ भूमि के मूल स्वामित्व दस्तावेज भी अदालत में जमा कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह भूखंड किसी भी प्रकार के बकाया या कानूनी देनदारी से मुक्त है।
सुब्रमण्यम ने कहा कि उनका मुवक्किल मामले के सौहार्दपूर्ण निपटारे के लिए मध्यस्थता से गुजरने को तैयार है।
विदेशी फर्म की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी और गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि वे विवाद को सुलझाने के लिए समयबद्ध मध्यस्थता के लिए सहमत हैं, बशर्ते कि प्रसाद की संपत्तियों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए और मध्यस्थता के निष्कर्ष तक कोई तीसरा पक्ष शामिल न किया जाए।
दोनों पक्षों की सहमति को ध्यान में रखते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने न्यायमूर्ति ललित को मध्यस्थ नियुक्त किया और उनसे शीघ्र निपटारा के लिए मध्यस्थता करने का अनुरोध किया।
पीठ ने न्यायमूर्ति ललित को खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, राकिया के प्रतिनिधियों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थिति के लिए ‘हाइब्रिड माध्यम’ से मध्यस्थता करने का निर्देश दिया।
भाषा आशीष रंजन
रंजन

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