न्यायालय ने काला सागर ड्रोन हमले के बाद लापता भारतीय नाविक का पता लगाने के सरकार को निर्देश दिए
न्यायालय ने काला सागर ड्रोन हमले के बाद लापता भारतीय नाविक का पता लगाने के सरकार को निर्देश दिए
नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को विदेश मंत्रालय से कहा कि वह अपने कूटनीतिक माध्यमों का उपयोग कर 25 जुलाई को काला सागर में ड्रोन हमले का शिकार हुए मालवाहक जहाज से लापता भारतीय नाविक का पता लगाए।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास और रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट स्थित भारतीय दूतावास से निर्देश प्राप्त करें तथा मालवाहक जहाज एमवी एजीएन रैग्नर पर सवार दीपक कुमार गुप्ता के बारे में जानकारी हासिल करें।
न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की है।
उच्चतम न्यायालय लापता नाविक के बड़े भाई संदीप कुमार गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में विदेश मंत्रालय को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह यूक्रेन और रोमानिया स्थित भारतीय दूतावासों के साथ समन्वय कर दीपक कुमार गुप्ता की खोज और बचाव अभियान चलाए।
याचिका में कहा गया है कि संदीप गुप्ता ने यह याचिका इसलिए दायर की, क्योंकि भारत सरकार और रोमानिया में भारतीय दूतावासों से परिवार द्वारा लगातार किए गए अनुरोधों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
याचिका के अनुसार, परिवार ने 26 जुलाई से 30 जुलाई के बीच विदेश मंत्रालय तथा दोनों देशों में भारतीय दूतावासों को कई पत्र लिखे, लेकिन न तो कोई जवाब मिला और न ही किसी तरह का सकारात्मक आश्वासन दिया गया।
दीपक कुमार गुप्ता (आयु 22 वर्ष) उस समय लापता हो गए थे, जब भारतीय चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रहा एक व्यापारी मालवाहक जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के निकट ड्रोन हमले की चपेट में आ गया था।
परिजनों के अनुसार, बरेली जिले के भरतौल गांव के निवासी दीपक एमवी एजीएन रैग्नर नामक व्यापारी मालवाहक जहाज पर चालक दल के सदस्य के रूप में कार्यरत थे।
हालांकि, उनका परिवार मूल रूप से बिहार के सिवान जिले का रहने वाला है, लेकिन पिछले कई वर्षों से बरेली के भरतौल गांव में रह रहा है।
भाषा गोला माधव
माधव
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