न्यायालय का गाजियाबाद में नाबालिग से बलात्कार-हत्या मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश

न्यायालय का गाजियाबाद में नाबालिग से बलात्कार-हत्या मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश

न्यायालय का गाजियाबाद में नाबालिग से बलात्कार-हत्या मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश
Modified Date: April 24, 2026 / 01:18 pm IST
Published Date: April 24, 2026 1:18 pm IST

नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पिछले महीने गाजियाबाद में चार साल की बच्ची के कथित तौर पर बलात्कार और उसकी हत्या के मामले की जांच के लिए शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के डीजीपी को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पाया कि बच्ची के माता-पिता गाजियाबाद पुलिस की जांच से असंतुष्ट थे। पीठ ने कहा कि एसआईटी का गठन शुक्रवार को या शनिवार सुबह 11 बजे तक कर दिया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी इस पीठ में शामिल हैं। पीठ ने निर्देश दिया कि एसआईटी में महिला पुलिस अधिकारी हों और इसका नेतृत्व आयुक्त या महानिरीक्षक रैंक की अधिकारी द्वारा किया जाए।

पीठ ने कहा कि एसआईटी बच्ची के माता-पिता द्वारा उठाई गई सभी शिकायतों की जांच करेगी और उन दो निजी अस्पतालों की भूमिका की भी जांच करेगी, जिन्होंने कथित तौर पर पीड़िता को इलाज देने से इनकार कर दिया था।

पीठ ने कहा कि एसआईटी दो सप्ताह के भीतर संबंधित निचली अदालत के समक्ष अपनी पूरक रिपोर्ट दाखिल करेगी और उसने निचली अदालत को तब तक मामले में कार्यवाही को स्थगित रखने का निर्देश दिया।

पीड़िता के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने यह आदेश पारित किया। याचिका में अदालत की निगरानी में एसआईटी या सीबीआई जांच का अनुरोध किया गया था।

पुलिस की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि इस मामले में आरोपपत्र पहले ही दायर किए जा चुके हैं और सुनवाई भी शुरू हो चुकी है।

उच्चतम न्यायालय ने 13 अप्रैल को मामले की सुनवाई करते हुए, गाजियाबाद पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच करने में ‘आनाकानी’ करने पर सवाल उठाया था।

मामले के अनुसार सोलह मार्च को एक पड़ोसी कथित तौर पर बच्ची को चॉकलेट दिलाने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। जब बच्ची वापस नहीं लौटी, तो उसके पिता ने उसकी तलाश शुरू की और उसे खून से लथपथ बेहोश पाया।

सर्वोच्च अदालत ने 10 अप्रैल को मामले की जांच में गाजियाबाद पुलिस के ‘असंवेदनशील रवैये’ की कड़ी निंदा की थी।

न्यायालय ने इस बात पर खेद व्यक्त किया था कि गाजियाबाद के दो निजी अस्पतालों ने खून से लथपथ बच्ची को भर्ती करने से इनकार कर दिया, जिसे अंततः एक सरकारी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा


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