उच्चतम न्यायालय ने एक वकील की पांच याचिकाएं निरर्थक बताकर खारिज कीं
उच्चतम न्यायालय ने एक वकील की पांच याचिकाएं निरर्थक बताकर खारिज कीं
नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक वकील द्वारा दायर पांच निरर्थक (फ्रिवोलस) जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया। इनमें एक याचिका ऐसी भी थी, जिसमें यह जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की गई थी कि क्या प्याज और लहसुन में ‘तामसिक’ (नकारात्मक) ऊर्जा होती है।
उच्चतम न्यायालय ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि क्या उन्होंने ये याचिकाएं आधी रात को तैयार की थीं।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने वकील सचिन गुप्ता को फटकार लगाते हुए कहा, “आधी रात को ये सब याचिकाएं तैयार करते हो क्या।”
प्रधान न्यायाधीश ने इन जनहित याचिकाओं को “अस्पष्ट, निरर्थक और निराधार” करार दिया।
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची भी थे। पीठ ने वकील को एक के बाद एक जनहित याचिकाएं दायर करने के लिए फटकार लगाई।
एक याचिका में प्याज और लहसुन में “तामसिक” या नकारात्मक तत्वों की मौजूदगी पर शोध करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
इस याचिका में जैन समुदाय के आहार का जिक्र किया गया था, जो पारंपरिक रूप से प्याज, लहसुन और कंदमूल वाली सब्जियां खाने से बचते हैं, क्योंकि इन्हें ‘तामसिक’ भोजन माना जाता है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पूछा, “आप जैन समुदाय की भावनाओं को क्यों आहत करना चाहते हैं?”
याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि यह एक सामान्य मुद्दा है और गुजरात में खाने में प्याज के इस्तेमाल को लेकर एक तलाक हुआ था।
सीजेआई ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “अगली बार जब आप इस तरह की निरर्थक याचिकाओं के साथ आएंगे, तो आप देखना कि हम क्या करेंगे।”
पीठ ने गुप्ता की चार अन्य जनहित याचिकाएं भी खारिज कर दीं, जिनमें से एक याचिका में शराब और तंबाकू उत्पादों में कथित रूप से मौजूद हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने का निर्देश मांगा गया था। एक याचिका में संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण को लेकर निर्देश देने का आग्रह था, जबकि एक और याचिका में शास्त्रीय भाषाओं की घोषणा के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था।
भाषा जोहेब दिलीप
दिलीप

Facebook


