न्यायालय ने दिल्ली दंगों के मामले में कलिता की केस डायरी को दोबारा तैयार करने की याचिका खारिज की

न्यायालय ने दिल्ली दंगों के मामले में कलिता की केस डायरी को दोबारा तैयार करने की याचिका खारिज की

न्यायालय ने दिल्ली दंगों के मामले में कलिता की केस डायरी को दोबारा तैयार करने की याचिका खारिज की
Modified Date: March 9, 2026 / 08:56 pm IST
Published Date: March 9, 2026 8:56 pm IST

नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली दंगों की आरोपी छात्र कार्यकर्ता देवांगना कलिता की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2020 के दंगों से संबंधित अपने खिलाफ चल रही जांच में केस डायरी को फिर से तैयार करने की मांग की थी।

केस डायरी को दोबारा तैयार करना एक कानूनी प्रक्रिया है जो जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार एवं न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 2025 के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें देवांगना की याचिका को आंशिक रूप से खारिज कर दिया गया था।

छात्र कार्यकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष द्वारा उसके खिलाफ उपलब्ध कराई गई कुछ सामग्री ‘पुरानी तारीख की’ थी और जाली प्रतीत होती थी।

पीठ ने याचिका के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुकदमा तीन साल पहले शुरू हुआ था और इस दौरान क्या कदम उठाए गए थे।

न्यायमूर्ति कुमार ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 172(3) (आरोपी को केस डायरी तक पहुंच का अधिकार नहीं) का हवाला देते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

पिछले साल 22 सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने देवांगना की केस डायरी को दोबारा तैयार किये जाने की याचिका को आंशिक रूप से खारिज कर दिया था, लेकिन दस्तावेज को सुरक्षित रखने के याचिकाकर्ता के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था।

इससे पहले, दो दिसंबर 2024 को उच्च न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश पारित कर दिल्ली पुलिस को केस डायरी को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।

देवांगना ने निचली अदालत के छह नवंबर 2024 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें केस डायरी मंगवाने के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था। पुलिस ने तब इस अनुरोध का विरोध करते हुए कहा था कि इससे मामले में और देरी होगी।

भाषा रंजन अविनाश

अविनाश


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