नेताजी बोस को ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने संबंधी याचिका उच्चतम न्यायालय ने खारिज की

नेताजी बोस को ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने संबंधी याचिका उच्चतम न्यायालय ने खारिज की

नेताजी बोस को ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने संबंधी याचिका उच्चतम न्यायालय ने खारिज की
Modified Date: April 20, 2026 / 01:49 pm IST
Published Date: April 20, 2026 1:49 pm IST

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (आईएनए) को भारत की आजादी का श्रेय देने का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका सोमवार को खारिज कर दी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को अदालत का समय बर्बाद करने के लिए फटकार लगाई।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ हम उच्चतम न्यायालय में आपके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा देंगे। हम पहले भी इसी तरह की याचिका खारिज कर चुके हैं।’’

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को पहले भी निरर्थक जनहित याचिकाएं दाखिल करने के लिए फटकार लगाई जा चुकी है। जब प्रधान न्यायाधीश ने पूछा कि क्या उन्होंने पहले भी ऐसी याचिका दाखिल की थीं, तो मोहंती ने जवाब दिया, ‘‘इस बार अलग है।’’

जब याचिका तैयार करने वाले के बारे में पूछा गया, तो मोहंती ने ‘‘मुखर्जी सर’’ का नाम लिया, जिससे पीठ और नाराज हो गई।

इस याचिका में यह अनुरोध किया गया था कि आधिकारिक रूप से यह घोषित किया जाए कि नेताजी की आईएनए ने 1947 में भारत को आंग्रेज शासन से स्वतंत्र कराया।

याचिका में अनुरोध किया गया था कि बोस को ‘‘राष्ट्र पुत्र’’ घोषित किया जाए।

पीठ ने कहा कि लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश के तहत यह जनहित याचिका दायर की गई है और इसी तरह की याचिका पहले भी खारिज की जा चुकी है।

अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि भविष्य में याचिकाकर्ता की किसी भी जनहित याचिका पर विचार न किया जाए।

भाषा जोहेब शोभना

शोभना


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