न्यायालय ने मणिपुर हिंसा के पीडितों की मदद के लिए वकीलों की नियुक्ति में देरी पर नाराजगी जताई

न्यायालय ने मणिपुर हिंसा के पीडितों की मदद के लिए वकीलों की नियुक्ति में देरी पर नाराजगी जताई

न्यायालय ने मणिपुर हिंसा के पीडितों की मदद के लिए वकीलों की नियुक्ति में देरी पर नाराजगी जताई
Modified Date: March 24, 2026 / 09:40 pm IST
Published Date: March 24, 2026 9:40 pm IST

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर में 2023 में हुई जातीय हिंसा को लेकर जारी मुकदमों की सुनवाई में पीड़ितों की कानूनी सहायता के लिए वकील नियुक्त करने में हो रही देरी पर सोमवार को गंभीर चिंता व्यक्त की।

न्यायालय ने असम और मणिपुर राज्य विधि सेवा प्राधिकरण को मुकदमे की सुनवाई में कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए स्थानीय भाषा जानने वाले वकीलों की नियुक्ति के संबंध में अपने पूर्व निर्देशों का पालन करने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘असम और मणिपुर के विधि सेवा प्राधिकरणों को प्रत्येक पीड़ित और उनके परिवार को कानूनी सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया था… विशेषकर उन लोगों को जो स्थानीय भाषा समझते हैं। हमें बताया गया है कि दोनों प्राधिकरण कानूनी सहायता के लिए वकीलों का चयन करने के वास्ते आपस में समन्वय कर रहे हैं। इसमें इतना समय नहीं लगना चाहिए था।’’

पीठ ने कहा, ‘‘मणिपुर के महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया है कि मामले का तत्काल समाधान किया जाएगा और पीड़ित तथा उनके परिवारों को कानूनी सहायता वकील उपलब्ध कराए जाएंगे।’’

इस दावे का खंडन करते हुए कि किसी भी पीड़ित को आरोपपत्र की प्रतियां नहीं दी गई हैं, सीबीआई की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि प्रत्येक पीड़ित को एक प्रति दी गई है।

पीठ ने सुनवाई के दौरान संज्ञान लिया कि 26 फरवरी को जारी किए गए निर्देशों सहित उसके पूर्व के आदेशों के बावजूद, पीड़ितों को कानूनी सहायता और महत्वपूर्ण दस्तावेजों तक पहुंच सुनिश्चित करने में बहुत कम प्रगति हुई है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमारा आदेश पारित हुए एक महीना हो गया है। किसी भी निर्देश का पालन नहीं किया गया है।’’

उच्चतम न्यायालय को सूचित किया गया कि असम और मणिपुर के विधि सेवा प्राधिकरण कानूनी सहायता के लिए वकीलों की सूची तैयार करने के लिए समन्वय कर रहे हैं।

हालांकि, पीठ ने टिप्पणी की कि इस प्रक्रिया में ‘‘इतना समय नहीं लगना चाहिए था’’ और मणिपुर सरकार से मिले आश्वासनों को रिकॉर्ड में दर्ज किया कि वकील की नियुक्ति तुरंत की जाएगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि मुकदमों में ‘लचर रवैया’ दिख रहा है, आरोपी पेश नहीं हो रहे हैं और पीड़ितों के परिवारों को आरोपपत्रों की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।

पीठ ने कहा कि कानूनी सहायता के लिए वकील की नियुक्त हो जाने के बाद, उन्हें पीड़ितों का प्रभावी ढंग से प्रतिनिधित्व करने के लिए तुरंत आरोपपत्रों की प्रतियां प्राप्त करनी चाहिए।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी ने अदालत को आश्वासन दिया कि यदि कोई विशिष्ट शिकायत उनके संज्ञान में लाई जाती है तो उसकी जांच की जाएगी।

मणिपुर में तीन मई, 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 200 से अधिक लोग मारे गए हैं, सैकड़ों घायल हुए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। यह हिंसा तब शुरू हुई जब पहाड़ी जिलों में बहुसंख्यक मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ का आयोजन किया गया था।

भाषा धीरज नेत्रपाल

नेत्रपाल


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