उच्चतम न्यायालय ने महंत नरेन्द्र गिरि की मौत के मामले में आरोपी आद्या तिवारी को जमानत दी

उच्चतम न्यायालय ने महंत नरेन्द्र गिरि की मौत के मामले में आरोपी आद्या तिवारी को जमानत दी

उच्चतम न्यायालय ने महंत नरेन्द्र गिरि की मौत के मामले में आरोपी आद्या तिवारी को जमानत दी
Modified Date: January 14, 2026 / 03:34 pm IST
Published Date: January 14, 2026 3:34 pm IST

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत नरेन्द्र गिरि की 2021 में हुई हत्या के मामले में आरोपी आद्या प्रसाद तिवारी को जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने उल्लेख किया कि मुकदमे को पूरा होने में समय लगने की संभावना है।

भारत में संतों के सबसे बड़े संगठन के अध्यक्ष गिरि 20 सितंबर 2021 को इलाहाबाद के बाघंबरी मठ में फंदे से लटके हुए पाए गए थे।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नवंबर 2021 में दाखिल अपने आरोपपत्र में कहा था कि गिरी को अपने अलग हो चुके शिष्य आनंद गिरी, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी से इतनी अधिक ‘‘मानसिक पीड़ा’’ मिली थी कि उन्होंने समाज में अपमानित होने से बचने के लिए अपनी जान दे दी।

 ⁠

सोमवार को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 14 अक्टूबर 2025 के उस आदेश को रद्द करते हुए आद्या प्रसाद तिवारी को जमानत दे दी, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

पीठ ने उल्लेख किया कि सीबीआई ने 150 गवाहों से पूछताछ करने की बात कही थी, लेकिन अब तक केवल तीन से ही पूछताछ की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि निकट भविष्य में मुकदमे के समाप्त होने की संभावना नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘इसतरह, यह स्पष्ट है कि मुकदमे को पूरा होने में समय लगेगा। वैसे भी, अपीलकर्ता मुख्य आरोपी प्रतीत नहीं होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, हमारा यह मानना है कि मुकदमे की सुनवाई तक अपीलकर्ता को और हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है।’’

न्यायालय ने कहा, ‘‘इस प्रकार, अपील स्वीकार करने योग्य है और अपीलकर्ता को जमानत देने का आदेश दिया जा सकता है।’ शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए यह आदेश दिया।

पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता 22 सितंबर 2021 से हिरासत में है और मुकदमे की सुनवाई तक उन्हें हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है। न्यायालय ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड के आधार पर, अपीलकर्ता इस मामले में ‘‘मुख्य आरोपी’’ प्रतीत नहीं होता है।

मामले में प्राथमिकी 21 सितंबर 2021 को प्रयागराज जिले के जॉर्ज टाउन पुलिस थाने में दर्ज की गई थी।

तिवारी को शुरू में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 18 नवंबर 2021 को दाखिल किेये गए बाद के आरोपपत्र में हत्या (धारा 302) और आपराधिक साजिश (धारा 120) के आरोप शामिल किये गए।

याचिका स्वीकार करते हुए, पीठ ने अपीलकर्ता को किसी भी गवाह को प्रलोभन, धमकी देने या वादा करने के खिलाफ आगाह किया।

पीठ ने तिवारी को निर्देश दिया कि जब तक विशेष रूप से छूट न दी जाए, वह मुकदमे की सभी कार्यवाही में पूरी निष्ठा से उपस्थित रहें। पीठ ने निचली अदालत को यह अधिकार दिया कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो वह जमानत रद्द कर सकती है।

जांच के दौरान सीबीआई को महंत का एक वीडियो मिला, जो कथित आत्महत्या से पहले रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो में महंत ने यह दावा किया था कि आनंद गिरी एक ‘‘संपादित वीडियो’’ जारी करने वाले थे, जिसमें उन्हें एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया जाता।

आरोपपत्र में आनंद गिरी, इलाहाबाद के बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और संदीप तिवारी पर आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप है।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में