उच्चतम न्यायालय ने यूएपीए मामले में सुहैल अहमद ठोकर को जमानत दी

उच्चतम न्यायालय ने यूएपीए मामले में सुहैल अहमद ठोकर को जमानत दी

उच्चतम न्यायालय ने यूएपीए मामले में सुहैल अहमद ठोकर को जमानत दी
Modified Date: May 22, 2026 / 04:39 pm IST
Published Date: May 22, 2026 4:39 pm IST

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के एक मामले में गिरफ्तार किये गये सुहैल अहमद ठोकर को शुक्रवार को जमानत दे दी।

ठोकर पर आरोप है कि उसने संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के बाद युवाओं को आतंकवादी संगठनों में शामिल करने, उन्हें कट्टरपंथ के रास्ते पर ले जाने और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के साथ रची थी।

केंद्र सरकार ने पांच अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया था। इन प्रावधानों के जरिये पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने ठोकर की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें उसने दिल्ली उच्च न्यायालय के सितंबर 2023 के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच वाले मामले में उसे जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

इस मामले में उसे 20 अक्टूबर, 2021 को गिरफ्तार किया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने हिरासत में बिताये गये समय और इस बात को ध्यान में रखते हुए कि मामले की सुनवाई पूरी होने में कुछ समय लगेगा, उसे जमानत दे दी।

इसने निर्देश दिया कि ठोकर को जमानत बॉण्ड प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत पर रिहा किया जाये।

ठोकर ने इससे पहले उच्च न्यायालय में जनवरी 2023 के अधीनस्थ अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि कश्मीर घाटी में एक बड़ी साजिश रचने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी और यह साजिश लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन समेत प्रतिबंधित आतंकवादी समूहों द्वारा रची गई थी।

यह आरोप लगाया गया था कि ये आतंकवादी समूह पाकिस्तान में अपने आकाओं के साथ मिलकर स्थानीय युवाओं को प्रभावित करने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने में शामिल थे।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि ठोकर ने आतंकवादी संगठनों के सदस्यों और इनके सहयोगियों को शरण देने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

भाषा देवेंद्र वैभव

वैभव


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