उच्चतम न्यायालय ने बिल विवाद को लेकर कोलकाता के अस्पताल के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने बिल विवाद को लेकर कोलकाता के अस्पताल के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने बिल विवाद को लेकर कोलकाता के अस्पताल के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द किया
Modified Date: May 13, 2026 / 02:32 pm IST
Published Date: May 13, 2026 2:32 pm IST

नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता के एक अस्पताल और उसके चेयरमैन के खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत रद्द कर दी और कहा कि बिल बनाने में गड़बड़ियां और सेवा से संबंधित शिकायतें मुख्य रूप से दीवानी (सिविल) प्रकृति की होती हैं और इन्हें फौजदारी अपराध नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति पामिदिघंटम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने मंगलवार को दिए गए एक फैसले में कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2023 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि पश्चिम बंगाल के बारासात स्थित नारायण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के खिलाफ प्रथम दृष्टया फौजदारी मामला बनता है।

यह मामला उस व्यक्ति द्वारा दायर शिकायत से उपजा है जिसकी मां का 2021 में अस्पताल में जांघ की हड्डी में फ्रैक्चर का इलाज किया गया था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने जानबूझकर एचआरसीटी जांच के लिए 2,500 रुपये वसूले, जबकि वह जांच कभी की ही नहीं गई और वह समय पर चिकित्सा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में भी विफल रहा।

एचआरसीटी (हाई-रेजोल्यूशन कंप्यूटेड टोमोग्राफी) स्कैन एक विशेष इमेजिंग जांच है जो फेफड़ों और छाती के ऊतकों की अत्यधिक विस्तृत, क्रॉस-सेक्शनल, 3डी छवियां प्रदान करता है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने अनुचित व्यवहार किया और पूछताछ करने पर धमकी दी।

इन आरोपों के आधार पर एक मजिस्ट्रेट अदालत ने अस्पताल, उसके चेयरमैन और कर्मचारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के साथ-साथ पश्चिम बंगाल क्लिनिकल प्रतिस्थापन अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के तहत नोटिस जारी किए थे।

अस्पताल ने कहा कि पहले एचआरसीटी जांच करने की बात थी, लेकिन बाद में चिकित्सकों को इसकी जरूरत नहीं लगी। अस्पताल ने कहा कि गलती का पता चलने पर एक संशोधित बिल जारी किया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने माना कि अस्पताल के खिलाफ लगाए गए फौजदारी आरोपों के लिए आवश्यक ‘बुनियादी तत्व’ मौजूद नहीं थे।

उसने कहा कि इस मामले में, बिल बनाने में हुई गड़बड़ी किसी धोखाधड़ी की साजिश के बजाय ‘अनजाने में हुई गलती’ प्रतीत होती है, खासकर इसलिए क्योंकि अस्पताल ने समय पर धन वापसी की पेशकश की थी।

भाषा शोभना वैभव

वैभव


लेखक के बारे में