न्यायालय ने बलात्कार के आरोप वाली प्राथमिकी रद्द की;‘ रिश्ते में कड़वाहक का मामला
न्यायालय ने बलात्कार के आरोप वाली प्राथमिकी रद्द की;‘ रिश्ते में कड़वाहक का मामला
नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शादी का झूठा वादा कर बलात्कार के आरोप वाली प्राथमिकी को बृहस्पतिवार को रद्द कर दिया और कहा कि तथ्य साफ तौर पर बताते हैं कि यह आपसी सहमति से बने रिश्ते का मामला था जो बाद में कड़वाहट में तब्दील हो गया।
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए था और अपने निजी रिश्तों में कड़वाहट आने पर राज्य को शामिल करने से बचना चाहिए था।
उच्चतम न्यायालय ने अपने कुछ पुराने फैसलों का हवाला दिया, जिसमें एक फैसला ऐसा भी था जिसमें इस परेशान करने वाली प्रवृत्ति पर ध्यान दिया गया था कि असफल या टूटे रिश्तों को आपराधिक रंग दिया जाता है।
पीठ ने पिछले साल मार्च के छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें बिलासपुर जिले में फरवरी 2025 में दर्ज प्राथमिकी से शुरू हुई कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।
न्यायालय ने कहा कि इस मामले में शिकायत करने वाली और आरोपी दोनों वकील हैं और शिकायत करने वाली 33 साल की शादीशुदा महिला है और एक नाबालिग बच्चे की मां है।
पीठ ने कहा, ‘‘इस न्यायालय ने बार-बार यह व्यवस्था दी है कि सिर्फ इस बात से कि पक्षों ने शादी के वादे के बाद शारीरिक संबंध बनाए, हर मामले में इसे बलात्कार नहीं माना जाएगा।’’
पीठ ने कहा कि अदालतों को बलात्कार की धारा के प्रावधान के तहत दायर किए गए असली मामलों की पहचान करने में बहुत सावधान और सतर्क रहना होगा, और अपराध साबित करने वाले जरूरी तत्वों की पहचान करनी होगी।
भाषा शफीक नरेश
नरेश

Facebook


