उच्चतम न्यायालय ने सुजान सिंह पार्क स्थित आवासीय परिसर खाली करने संबंधी आदेश को रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने सुजान सिंह पार्क स्थित आवासीय परिसर खाली करने संबंधी आदेश को रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने सुजान सिंह पार्क स्थित आवासीय परिसर खाली करने संबंधी आदेश को रद्द किया
Modified Date: April 22, 2026 / 09:16 pm IST
Published Date: April 22, 2026 9:16 pm IST

नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने एक अहम फैसले में बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें केंद्र को राष्ट्रीय राजधानी के सुजान सिंह पार्क में आवासीय परिसरों को खाली करने का आदेश दिया गया था।

उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने फैसला सुनाया कि सुजान सिंह पार्क में आवासीय परिसरों पर केंद्र सरकार का कब्जा डीआरसी (दिल्ली किराया नियंत्रण) अधिनियम द्वारा शासित नहीं है, बल्कि यह विशेष रूप से 1945 के सरकारी अनुदान की शर्तों द्वारा विनियमित है।

पीठ ने वर्तमान मामले में दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 पर सरकारी अनुदान अधिनियम, 1895 की सर्वोच्चता को भी बरकरार रखा।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हमारे इस स्पष्ट निष्कर्ष को देखते हुए कि डीआरसी अधिनियम वर्तमान मामले में किसी भी प्रकार से लागू नहीं होता है, वह मूल आधार ही समाप्त हो गया है जिस पर एआरसी (अतिरिक्त किराया नियंत्रक) ने प्रतिवादी द्वारा दायर बेदखली के मुकदमे पर सुनवाई करने का अधिकार हासिल किया था।’’

न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘‘पक्षों के बीच संबंधों के कानूनी स्वरूप से भिन्न एक वैधानिक व्यवस्था के तहत बेदखली की कार्यवाही शुरू की गई, उस पर विचार किया गया और उसका निर्णय लिया गया, इसलिए यह कार्यवाही प्रारंभ से ही त्रुटिपूर्ण है।’’

न्यायालय ने कहा कि सरकार द्वारा ‘‘सरकारी अनुदान’’ के रूप में जारी किए गए स्थायी पट्टे के तहत कब्जे में लिये गए परिसर पूरी तरह से उस अनुदान की शर्तों के अधीन हैं।

पीठ ने कहा कि इसलिए, इस तरह की व्यवस्थाएं डीआरसी अधिनियम के प्रावधानों से मुक्त हैं।

यह मामला 26 अप्रैल 1945 को ‘गवर्नर जनरल इन काउंसिल’ द्वारा सर सोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में निष्पादित एक स्थायी पट्टा विलेख से संबंधित है।

यह पट्टा लगभग 100 आवासीय फ्लैट के निर्माण के लिए 7.58 एकड़ भूमि से संबंधित है।

आवंटन पत्र की एक शर्त के तहत, केंद्र सरकार ने अपने अधिकारियों को ‘‘उचित किराये’’ पर 50 प्रतिशत फ्लैट पट्टे पर देने का अधिकार सुरक्षित रखा था।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश


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