भ्रष्टाचार मामलों में प्राथमिकी खारिज करने का फैसला शीर्ष अदालत ने खारिज किया
भ्रष्टाचार मामलों में प्राथमिकी खारिज करने का फैसला शीर्ष अदालत ने खारिज किया
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें भ्रष्टाचार के मामलों में दर्ज कुछ प्राथमिकियां अमान्य घोषित कर दी गयी थीं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी रद्द करवाने की ‘अनावश्यक जहमत’ उठायी ।
उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण को ‘न्याय का उपहास’ करार देते हुए न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय इन मामलों में दर्ज प्राथमिकी या लंबित जांच को चुनौती देने वाली किसी भी नई याचिका पर अब सुनवाई नहीं करेगा।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय ने यह कदम केवल प्राथमिकी दर्ज करने वाले थाने के क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर उठाया।
शीर्ष अदालत ने राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और अन्य की अपील पर अपना यह फैसला सुनाया। अपीलकर्ताओं ने उच्च न्यायालय के अगस्त, 2025 के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।
पीठ ने कहा कि वह ऐसे मामलों से निपट रही है जहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कथित अपराधों के लिए दर्ज प्राथमिकियों को रद्द कर दिया गया था, फलस्वरूप कुछ मामलों में जांच शुरू होने से पहले ही रुक गई, जबकि अन्य में, आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई।
पीठ ने कहा, “हमारे सुविचारित मत में उच्च न्यायालय का दृष्टिकोण न्याय का उपहास मात्र है। यदि अत्यधिक तकनीकी आधार पर प्राथमिकी को रद्द किया जाता है, तो उच्च न्यायालय का दायित्व है कि वह उस अधिकार-क्षेत्र के संबंध में कानून स्पष्ट करे, जो अन्यथा अस्तित्व में है।”
शीर्ष अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों के लिए 2016 एवं 2020 के बीच एसीबी के विजयवाड़ा थाने में कई प्राथमिकियां दर्ज की गईं।
पीठ ने कहा कि इन प्राथमिकियों को आरोपियों द्वारा मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि एसीबी, केंद्रीय जांच इकाई, आंध्र प्रदेश, विजयवाड़ा थाने को सीआरपीसी की धारा दो के तहत पुलिस थाने के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया था और इसलिए प्राथमिकी दर्ज करने का अधिकार क्षेत्र उसके पास नहीं था।
उच्चतम न्यायालय ने कहा ,‘‘उच्च न्यायालय का यह तर्क कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 2(एस) के उचित अनुपालन के लिए अधिसूचना के माध्यम से घोषणा को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया जाना आवश्यक है, कम से कम अस्वीकार्य है। हमें इसके सार और भावना के अनुरूप उचित अनुपालन को देखना होगा।’’
भाषा राजकुमार प्रशांत
प्रशांत

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