न्यायालय ने गुजरात पुलिस के नोटिस के खिलाफ पत्रकार रवि नायर की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
न्यायालय ने गुजरात पुलिस के नोटिस के खिलाफ पत्रकार रवि नायर की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पत्रकार रवि नायर द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने एक समाचारपत्र में कथित मानहानिकारक लेख के संबंध में ‘अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड’ की शिकायत पर गुजरात अपराध शाखा द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने नायर को गुजरात पुलिस की किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण प्रदान करने से भी इनकार कर दिया और उन्हें संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करने के लिए कहा।
अधिवक्ता पारस नाथ सिंह के माध्यम से दायर अपनी याचिका में, नायर ने अपराध शाखा के 12 फरवरी, 2026 के नोटिस को चुनौती दी, जिसमें उन्हें 19 फरवरी को जांच अधिकारी के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के लिए कहा गया था।
नायर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने दलील दी कि कंपनी ने लेख के संबंध में पत्रकार के खिलाफ तीन मामले शुरू किए हैं और उनके मुवक्किल को परेशान किया जा रहा है।
पीठ ने ग्रोवर से पूछा कि उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका क्यों दायर की है, और उन्होंने राहत के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय में अपील क्यों नहीं की।
पीठ ने कहा कि नायर संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करें।
ग्रोवर ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, हालांकि अपने मुवक्किल के उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण का अनुरोध किया।
पीठ ने संरक्षण प्रदान करने से इनकार कर दिया और कहा कि अब याचिका को इलेक्ट्रॉनिक रूप से दाखिल करने का विकल्प उपलब्ध है।
अदाणी समूह ने आपराधिक मानहानि का भी मुकदमा दायर किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि नायर ने मानहानिकारक प्रकृति की सामग्री प्रकाशित की और कई ट्वीट किए, जिनका उद्देश्य कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था।
भाषा शफीक नेत्रपाल
नेत्रपाल

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