गुरुग्राम ध्वस्तीकरण अभियान मामले में दायर याचिका पर सुनवाई से न्यायालय का इनकार

गुरुग्राम ध्वस्तीकरण अभियान मामले में दायर याचिका पर सुनवाई से न्यायालय का इनकार

गुरुग्राम ध्वस्तीकरण अभियान मामले में दायर याचिका पर सुनवाई से न्यायालय का इनकार
Modified Date: April 27, 2026 / 03:29 pm IST
Published Date: April 27, 2026 3:29 pm IST

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गुरुग्राम में जारी तोड़फोड़ अभियान के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका अस्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता दी कि वे आज ही उच्च न्यायालय के समक्ष मामले का तत्काल उल्लेख कर सकते हैं।

पीठ ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि व‍ह दोपहर एक बजे या फिर दोपहर भोज के तुरंत बाद 1:45 बजे याचिका के आपात उल्लेख की अनुमति दें।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल संकरनारायणन ने पीठ के समक्ष दलील दी कि स्थानीय प्रशासन उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या करते हुए बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए ध्वस्तीकरण अभियान चला रहा है।

पीठ ने कहा कि यदि उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या की जा रही है तो याचिकाकर्ताओं को उसी अदालत का रुख करना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “अगर उच्च न्यायालय अपने संवैधानिक कर्तव्य के तहत अवैध निर्माण को रोकने या हटाने के लिए अभियान चला रहा है तो सर्वोच्च संस्था होने के नाते हम इसमें बाधा क्यों डालें?

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि उच्च न्यायालय ने ध्वस्तीकरण को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया है।

उन्होंने पीठ से तीन से चार दिन तक यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया और कहा कि इस दौरान याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।

वकील ने कहा, “वे पूरी तरह से वैध निर्माण हैं।”

उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता वहां के निवासी हैं और अधिकारी कारण बताओ नोटिस दिए बिना ध्वस्तीकरण अभियान चला रहे हैं।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश


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