उमर खालिद को जमानत देने से उच्चतम न्यायालय का इनकार ‘‘न्याय का मखौल’’ : महबूबा मुफ्ती

उमर खालिद को जमानत देने से उच्चतम न्यायालय का इनकार ‘‘न्याय का मखौल’’ : महबूबा मुफ्ती

उमर खालिद को जमानत देने से उच्चतम न्यायालय का इनकार ‘‘न्याय का मखौल’’ : महबूबा मुफ्ती
Modified Date: January 5, 2026 / 05:36 pm IST
Published Date: January 5, 2026 5:36 pm IST

श्रीनगर, पांच जनवरी (भाषा) पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को कहा कि 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में कार्यकर्ता उमर खालिद को उच्चतम न्यायालय द्वारा जमानत देने से इनकार करना ‘‘न्याय का मखौल’’ है, जबकि बलात्कार के दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल दी जा रही है।

उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया लेकिन ‘‘भागीदारी के स्तर के क्रम’’ का हवाला देते हुए पांच अन्य को जमानत दे दी और कहा कि मामले में सभी आरोपी एक ही पायदान पर नहीं हैं।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि खालिद और इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

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महबूबा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘न्याय का कैसा मखौल है! एक तरफ गुरमीत सिंह, जिसे बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया गया है, उसको बार-बार पैरोल मिल रही है। दूसरी तरफ उमर खालिद, जो केवल आरोपी है और जिसके खिलाफ अभी तक मुकदमा शुरू नहीं हुआ है, पांच साल से अधिक समय से जेल में है और आज उच्चतम न्यायालय ने भी उसे जमानत देने से इनकार कर दिया। अन्याय के बोझ तले न्याय का तराजू टूट रहा है।’’

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

भाषा अविनाश मनीषा

मनीषा


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