शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने को दायर जनहित याचिका पर न्यायालय ने सरकारों से जवाब मांगा

शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने को दायर जनहित याचिका पर न्यायालय ने सरकारों से जवाब मांगा

शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने को दायर जनहित याचिका पर न्यायालय ने सरकारों से जवाब मांगा
Modified Date: April 13, 2026 / 01:09 pm IST
Published Date: April 13, 2026 1:09 pm IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर केंद्र, राज्यों और सभी केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा जिसमें आरटीई (शिक्षा का अधिकार) कानून को लागू करने का अनुरोध किया गया है। यह कानून छह से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अनिवार्य करता है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता हरिप्रिया पटेल की ओर से पेश वकील की दलीलों पर गौर किया, जिन्होंने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नयी शिक्षा नीति लागू करने का भी अनुरोध किया था।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम नोटिस जारी कर रहे हैं। हम इस मुद्दे पर गौर करना चाहेंगे।’’

शुरुआत में, वकील ने कहा कि प्रमुख मुद्दों में से एक देश भर में बच्चों के लिए पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को लागू किया जाना है। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के क्रियान्वयन का मुद्दा भी उठाया, जिसे समय-समय पर अद्यतन किया गया है।

नयी शिक्षा नीति (एनईपी) एक व्यापक ढांचा है जो शिक्षा प्रणाली को लचीलेपन, कौशल विकास और समग्र शिक्षा पर केंद्रित करते हुए रूपांतरित करता है।

जनहित याचिका में नि:शुल्‍क और अनिवार्य बाल शिक्षा (आरटीई) अधिनियम, 2009 के पूर्ण क्रियान्वयन का भी अनुरोध किया गया है।

यह कानून 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अनिवार्य करता है और पड़ोस के स्कूल में मूलभूत शिक्षा सुनिश्चित करता है। साथ ही यह भी अनिवार्य करता है कि निजी विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 25 प्रतिशत सीट आरक्षित हों।

केंद्र के अलावा, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जनहित याचिका में पक्षकार बनाया गया है।

भाषा

अमित वैभव

वैभव


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