उच्चतम न्यायालय ने विदेशी मेडिकल स्नातकों को वजीफा का भुगतान नहीं होने पर जवाब मांगा
उच्चतम न्यायालय ने विदेशी मेडिकल स्नातकों को वजीफा का भुगतान नहीं होने पर जवाब मांगा
नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा कि विदेशी संस्थानों से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले स्नातकों को कुछ कॉलेजों में वजीफा क्यों नहीं दिया जा रहा है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने राजस्थान सरकार को दो सप्ताह के भीतर छात्रों को वजीफा जारी करने का निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं होने पर राज्य के सचिव को अदालत में तलब किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता तन्वी दुबे ने एक चार्ट पेश किया, जिसमें बताया गया कि कुछ कॉलेज विदेशी मेडिकल स्नातकों को कोई वजीफा नहीं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एनएमसी का एक परिपत्र है, जिसमें भारतीय और विदेशी मेडिकल स्नातकों के बीच समानता रखने का प्रावधान है।
दुबे ने कहा कि इसके बावजूद अधिकांश राज्यों में विदेशी और भारतीय मेडिकल स्नातकों को वजीफा देने के मामले में समानता नहीं है, जबकि दोनों एक ही तरह के कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं और समान घंटे काम कर रहे हैं।
शीर्ष अदालत ने अब इस मामले को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
इससे पहले एनएमसी ने शीर्ष अदालत को बताया था कि 756 मेडिकल कॉलेजों में से सात कॉलेज इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट या सीनियर रेजिडेंट को वजीफा नहीं दे रहे हैं और उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किए गए हैं।
शीर्ष अदालत मेडिकल स्नातक अभिषेक यादव और अन्य की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मेडिकल छात्रों को वजीफे के भुगतान का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
भाषा शफीक सुरेश
सुरेश

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