Supreme Court SIR Hearing: चुनाव आयोग की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, कहा-कानून के हिसाब से हो रही SIR की प्रक्रिया, क्या अब और सख्त होगा अभियान?

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Supreme Court SIR Hearing: नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि चुनावी सूची की शुद्धता बनाए रखना इलेक्शन कमीशन का संवैधानिक अधिकार है।

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  • Publish Date - May 27, 2026 / 11:31 AM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 11:37 AM IST

supreme court/ image source: ibc24 file image

HIGHLIGHTS
  • दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में SIR पर सुनवाई
  • SIR कराना चुनाव आयोग का अधिकार
  • देश में SIR चलता रहेगा: सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court SIR Hearing: नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि चुनावी सूची की शुद्धता बनाए रखना Election Commission of India का संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि SIR प्रक्रिया को अवैध नहीं माना जा सकता, क्योंकि चुनाव आयोग ने इसे कानून और निर्धारित नियमों के तहत लागू किया है।

Supreme Court: SIR को बताया आवश्यक प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि देश में मतदाता सूची की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर इस तरह की प्रक्रिया आवश्यक होती है। अदालत ने माना कि आयोग को चुनाव संबंधी व्यवस्थाओं में पर्याप्त स्वतंत्रता और अधिकार प्राप्त हैं, इसलिए उसकी शक्तियों में अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।

Election Commission of India: कानून के हिसाब से कराया गया-कोर्ट

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया में सभी कानूनी औपचारिकताओं और प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची के सत्यापन और पुनरीक्षण का अधिकार संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून से मिला है।

क्या है यह पूरा विवाद ?

यह मामला तब विवादों में आया था जब चुनाव आयोग ने जून 2025 में बिहार से SIR अभियान शुरू किया और बाद में इसे पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में भी लागू किया। प्रक्रिया के तहत 2002-03 की मतदाता सूची में नाम न होने पर मतदाताओं से वंशावली संबंधी दस्तावेज मांगे गए थे। ADR, PUCL, योगेंद्र यादव और अन्य नेताओं ने इसे NRC जैसी प्रक्रिया बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि इससे गरीब, प्रवासी और वंचित वर्ग के लोग वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं, जबकि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं है। वहीं चुनाव आयोग ने कहा कि मृत, डुप्लीकेट और दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाताओं के नाम हटाना जरूरी है ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 और 326 के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार रखता है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सत्यापन प्रक्रिया में आधार जैसे अतिरिक्त दस्तावेज स्वीकार किए जाएं ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।

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