असम के मुख्यमंत्री के ‘मुस्लिम विरोधी’ बयानों का संज्ञान ले उच्चतम न्यायालय : पर्सनल लॉ बोर्ड

असम के मुख्यमंत्री के ‘मुस्लिम विरोधी’ बयानों का संज्ञान ले उच्चतम न्यायालय : पर्सनल लॉ बोर्ड

असम के मुख्यमंत्री के ‘मुस्लिम विरोधी’ बयानों का संज्ञान ले उच्चतम न्यायालय : पर्सनल लॉ बोर्ड
Modified Date: March 3, 2026 / 07:17 pm IST
Published Date: March 3, 2026 7:17 pm IST

नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के ‘‘मुस्लिम विरोधी’’ बयानों की मंगलवार को निंदा करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।

इस मुस्लिम संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से ‘‘खतरनाक और असंवैधानिक’’ टिप्पणी करने के लिए शर्मा के खिलाफ उचित संवैधानिक कार्रवाई करने की भी अपील की।

बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने एक बयान में आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के लोगों के राजनीतिक बयानों में मुसलमानों के खिलाफ नफरत भरी बातें करना और खुले तौर पर उकसाना सामान्य बात हो गई है।

बोर्ड के बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री शर्मा ने पिछले दिनों असम के तिनसुकिया में एक सरकारी समारोह को संबोधित करते हुए ‘‘मियां’’ समुदाय को परेशान करने का आह्वान किया था, ताकि वे असम छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएं।

इलियास ने कहा कि यह चौंकाने वाला और अस्वीकार्य बयान है, क्योंकि एक मुख्यमंत्री, जिसने संविधान को बनाए रखने की शपथ ली है, खुले तौर पर एक समुदाय विशेष के साथ भेदभाव, उत्पीड़न और मताधिकार से वंचित करने की वकालत करते नजर आ रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पर्सनल लॉ बोर्ड ने प्रधान न्यायाधीश से बिना देरी के हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। दृढ़तापूर्वक और तेजी से कार्रवाई करने में विफलता से नफरत फैलाने वाले भाषणों को बढ़ावा मिल सकता है और सामाजिक अशांति और अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है।’’

भाषा हक हक दिलीप

दिलीप


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