न्यायालय ने धन शोधन मामले में गुजरात के पत्रकार की अंतरिम जमानत बरकरार रखी
न्यायालय ने धन शोधन मामले में गुजरात के पत्रकार की अंतरिम जमानत बरकरार रखी
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अहमदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन के एक मामले में पत्रकार महेश लांगा को दी गयी अंतरिम जमानत शुक्रवार को बरकरार रखी।
न्यायालय ने पिछले वर्ष 15 दिसंबर को लांगा को अंतरिम जमानत दी थी और मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल के लिए तय की थी।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने जांच एजेंसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर गौर करते हुए कहा कि अंतरिम आदेश की पुष्टि की जाती है।
पीठ ने मेहता की इस दलील से सहमति जताई कि जमानत आदेश में की गई टिप्पणियों को मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं माना जाएगा। लांगा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की।
इससे पहले जमानत का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा था, ‘‘पत्रकारों द्वारा पैसे की उगाही करना और यह कहना कि यदि भुगतान नहीं किया तो आपके खिलाफ लिखेंगे, एक गंभीर अपराध है।’’
पीठ ने राहत देते हुए मामले में दैनिक आधार पर सुनवाई का आदेश दिया और पत्रकार पर कुछ शर्तें लगाईं। इनमें यह भी शामिल है कि वह अपने लंबित मामले पर कोई लेख नहीं लिखेंगे और विशेष अदालत में अनावश्यक स्थगन नहीं मांगेंगे।
न्यायालय ने कहा, “याचिकाकर्ता धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत नामित विशेष अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत मुचलका जमा करेगा।’’ साथ ही निर्देश दिया कि विशेष अदालत आरोपों पर विचार के लिए रोजाना सुनवाई करे और यदि आरोप तय होते हैं तो सभी नौ गवाहों के बयान दर्ज करे।
पीठ ने लांगा और उनके वकील को निचली अदालत में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया और कहा कि इस आधार पर कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा कि उच्च न्यायालय में याचिका लंबित है।
उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि चूंकि उच्च न्यायालय ने मुकदमे की सुनवाई पर रोक नहीं लगाई है, इसलिए यह शर्त लगाई जा रही है। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय को भी विशेष न्यायाधीश के साथ सहयोग करने को कहा गया।
न्यायालय ने कहा कि लांगा को कानून के अनुसार अपने सभी कानूनी तर्क, आपत्तियां और बचाव पेश करने की स्वतंत्रता होगी।
पीठ ने स्पष्ट किया, ‘‘याचिकाकर्ता, एक समाचार पत्र के सहायक संपादक के रूप में अहमदाबाद की विशेष अदालत में अपने खिलाफ लंबित मामले से संबंधित आरोपों पर कोई लेख प्रकाशित नहीं कर सकता या लिख नहीं सकता।’’
साथ ही यह भी कहा गया कि अंतरिम जमानत याचिकाकर्ता के ‘‘अच्छे आचरण और व्यवहार’’ के अधीन रहेगी।
गुजरात उच्च न्यायालय ने पिछले साल 31 जुलाई को यह कहते हुए लांगा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी कि राहत मिलने से अभियोजन पक्ष को नुकसान हो सकता है।
ईडी ने 25 फरवरी 2025 को कहा था कि उसने कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में लांगा को गिरफ्तार किया है।
पत्रकार को पहली बार अक्टूबर 2024 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया था।
लांगा के खिलाफ धन शोधन का मामला अहमदाबाद पुलिस द्वारा दर्ज दो प्राथमिकियों से जुड़ा है, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक गबन, आपराधिक विश्वासघात, ठगी और कुछ लोगों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप शामिल हैं।
भाषा गोला वैभव
वैभव

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