सूरत: नगर निकाय के आदेश के बिना झुग्गी-बस्ती गिराने के मामले में पांच अधिकारी निलंबित

सूरत: नगर निकाय के आदेश के बिना झुग्गी-बस्ती गिराने के मामले में पांच अधिकारी निलंबित

सूरत: नगर निकाय के आदेश के बिना झुग्गी-बस्ती गिराने के मामले में पांच अधिकारी निलंबित
Modified Date: July 1, 2026 / 05:04 pm IST
Published Date: July 1, 2026 5:04 pm IST

सूरत (गुजरात), एक जुलाई (भाषा) सूरत नगर निगम (एसएमसी) के पांच अधिकारियों को मई में नासिरनगर इलाके में लगभग 80 झुग्गियों को ‘रहस्यमय’ तरीके से गिराए जाने के मामले में निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई नगर निकाय के इस दावे के कुछ दिनों बाद की गई है कि इस अभियान में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।

एसएमसी ने बुधवार को एक बयान में कहा कि 30 मई को की गई तोड़-फोड़ की जांच करने वाली एक आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय जांच शुरू की गई है।

इसमें कहा गया है कि अधिशासी अभियंता सुजलकुमार प्रजापति और जयांग जीवन रामजीवाला, उप अभियंता अर्पण परमार, सहायक अभियंता मोनिक गढ़िया तथा कनिष्ठ अभियंता नरेशकुमार गलचर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके।

हालांकि, नगर निकाय ने जांच समिति के नतीजों का खुलासा नहीं किया और न ही तोड़-फोड़ की कार्रवाई में निलंबित किए गए अधिकारियों की कथित भूमिका के बारे में कोई जानकारी दी।

नासिरनगर में लगभग 80 झुग्गियों को गिराए जाने से विवाद शुरू हो गया; एसएमसी ने इसमें किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया और मीडिया में आई खबरों के बाद जांच के आदेश दिए।

एसएमसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष राजन पटेल ने कहा था कि शुरुआती जांच से पता चला है कि नगर निकाय के अधिकारी सड़क की सीमा तय करने के लिए ही उस जगह पर गए थे।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर उस भवन निर्माता के फायदे के लिए की गई, जिसकी उस जमीन में दिलचस्पी थी। भाजपा ने इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

भाषा

शुभम माधव

माधव


लेखक के बारे में