‘लुंगीवाला’ टिप्पणी विवाद पर सुष्मिता देव ने दी सफाई, नड्डा ने ब्रिटास से मामला सुलझाने की पेशकश की
‘लुंगीवाला’ टिप्पणी विवाद पर सुष्मिता देव ने दी सफाई, नड्डा ने ब्रिटास से मामला सुलझाने की पेशकश की
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी की सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को कहा कि उन्होंने किसी राज्य की वेशभूषा पर कोई टिप्पणी नहीं की और राज्यसभा से ऐसा कोई संदेश नहीं जाना चाहिए जिससे भारत को सांस्कृतिक या धार्मिक आधार पर बांटने की भावना पैदा हो।
यह स्पष्टीकरण उन्होंने माकपा सांसद जॉन ब्रिटास के उस आरोप के सिलसिले में दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि सोमवार को सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा सदस्य ने उन्हें बार-बार ‘‘लुंगीवाला’’ कहा था।
पूर्वाह्न 11 बजे राज्यसभा की बैठक शुरू होने पर इस मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ था, जिसके बाद सभापति सी पी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी थी।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सुष्मिता देव ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं असम की बंगाली हूं। मैंने अलग-अलग राज्यों को देखा है, जहां हम अलग-अलग तरह की वेशभूषा और कपड़े पहनते हैं। न तो मैंने और न ही किसी सदस्य ने किसी राज्य की पोशाक पर कोई टिप्पणी की है। मैं इसे रिकॉर्ड पर रखना चाहती हूं।’’
सुष्मिता देव ने कहा कि वह ब्रिटास को लंबे समय से जानती हैं।
उन्होंने कहा कि इस सदन से ऐसा कोई संदेश नहीं जाना चाहिए कि कोई सदस्य भारत में सांस्कृतिक या धार्मिक आधार पर विभाजन चाहता है।
सदन के नेता जे पी नड्डा ने दोनों सांसदों के बीच पैदा हुई गलतफहमी को दूर करने की पेशकश की।
नड्डा ने कहा, ‘‘अगर दोनों सांसद मेरे कक्ष में आते हैं तो इस गलतफहमी को दूर किया जा सकता है।’’
इससे पहले, बुधवार को दिन की कार्यवाही शुरू होने के बाद सूचीबद्ध दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के तुरंत बाद ब्रिटास ने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने नाम लिए बिना कहा कि भाजपा की एक सदस्य ने उन्हें कथित तौर पर ‘‘लुंगीवाला’’ कहकर निशाना बनाया। विपक्षी सदस्यों ने ब्रिटास का समर्थन किया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि जब यह कथित घटना हुई थी तब वह सदन में मौजूद थे। उन्होंने सभापति से अनुरोध किया कि वह संबद्ध सदस्यों को अपने कक्ष में बुलाएं और उनकी बात सुन कर समाधान निकालें।
सभापति राधाकृष्णन ने कहा कि सदन में एक सदस्य द्वारा दूसरे सदस्य के खिलाफ कथित अमर्यादित टिप्पणी करने का मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि सदस्यों को टिप्पणियां करते समय यह बात ध्यान में रखना चाहिए कि किसी की भावनाएं आहत न हों।
उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति अनूठी है और विविधता में एकता हमारी विशेषता है जो बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा ‘‘किसी की संस्कृति को लेकर कोई भी आहत करने वाली बात कहना ठीक नहीं है।’’
सभापति ने कहा कि वह संबंधित सांसदों को अपने कक्ष में बुलाकर इस मामले पर चर्चा करेंगे।
सभापति ने शून्यकाल शुरू कराने का प्रयास किया। इसी बीच विपक्षी सदस्यों और सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच तीखी तकरार होने लगी।
रीजीजू ने पुन: अपील की कि सभापति दोनों सदस्यों को अपने कक्ष में बुला कर इस मुद्दे का समाधान करें।
सदन के नेता नड्डा ने कहा कि हर राज्य की वेशभूषा का सम्मान किया जाना चाहिए।
नड्डा ने नाम लेकर कहा कि कोई फैसला लेने से पहले सुष्मिता देव का पक्ष भी सुना जाना चाहिए। सदन में सुष्मिता देव मौजूद थीं।
इस बीच, कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी सांसदों ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने का अवसर देने की मांग की। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे की कथित चोरी को लेकर नारेबाजी की।
हंगामे के बीच सभापति राधाकृष्णन ने बारह बज कर बीस मिनट पर सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश

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