जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी तत्वों को पुनर्जीवित करने के लिए ‘क्रिप्टो हवाला’ के इस्तेमाल का संदेह
जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी तत्वों को पुनर्जीवित करने के लिए ‘क्रिप्टो हवाला’ के इस्तेमाल का संदेह
(सुमीर कौल)
श्रीनगर/नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) सुरक्षा एजेंसियों ने एक ‘क्रिप्टो हवाला’ नेटवर्क का पता लगाया है, जो देश के वित्तीय सुरक्षा उपायों को दरकिनार करते हुए जम्मू-कश्मीर में विदेशी धन का अवैध प्रवाह कर रहा है। इससे गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं कि इस धन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने के लिए किया जा रहा है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि इस आशंका के बाद सुरक्षा एजेंसियां उच्च सतर्कता बरत रही हैं। उन्होंने चेताया कि इस गुप्त धन का उद्देश्य अलगाववादी तत्वों को पुनर्जीवित करना और केंद्र-शासित प्रदेश के भीतर राष्ट्र-विरोधी विमर्श को फिर से भड़काना है, जिसे पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से लगभग निष्क्रिय कर दिया गया था।
परंपरागत हवाला प्रणाली में जहां गैर-बैंकिंग तंत्र के माध्यम से पैसा भेजा जाता है, वहीं ‘क्रिप्टो हवाला’ के तहत डिजिटल तरीके से अनियमित क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि लेन-देन का पता लगाना संभव न हो।
भारत में जहां सभी ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर’ (वीडीए एसपी) के लिए वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) के साथ पंजीकरण करना अनिवार्य है, वहीं यह क्रिप्टो हवाला नेटवर्क पूरी तरह से गुप्त रूप से संचालित होता है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ किए गए एक विस्तृत अध्ययन में चीन, मलेशिया, म्यांमा और कंबोडिया जैसे देशों के लोगों की पहचान की गई है, जो केंद्र-शासित प्रदेश के लोगों को निजी ‘क्रिप्टो वॉलेट’ बनाने के लिए निर्देशित कर रहे हैं।
ये वॉलेट अक्सर ‘वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क’ (वीपीएन) का इस्तेमाल करके बनाए जाते हैं, ताकि इनके बारे में पता न चल सके और इनमें ग्राहक की पहचान के सत्यापन की आवश्यकता न हो।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी में वीपीएन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, क्योंकि हाल में इस क्षेत्र में ‘क्रिप्टो वॉलेट’ में पंजीकरण के मामले तेजी से बढ़ रहे थे।
‘वीपीएन’, आतंकवादियों और अलगाववादियों के लिए पहचान से बचने का एक साधन है।
अधिकारियों ने बताया कि विदेश में बैठा आका सीधे इन निजी वॉलेट में क्रिप्टोकरेंसी भेजता है, जिससे विनियमित वित्तीय संस्थान को शामिल किए बिना लेन-देन होता है, और वॉलेट धारक दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों की यात्रा करता है, ताकि अनियमित तरीके से नकदी के बदले क्रिप्टोकरेंसी बेच सके।
भाषा
शफीक पारुल
पारुल

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